दाऊदी बोहरा समाज ने श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया यौम-ए-आशूरा
गाडरवारा में दाऊदी बोहरा समाज ने यौम-ए-आशूरा श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया। झंडा चौक से बोहरा मस्जिद तक मक़तल जुलूस निकाला गया, जिसमें नोहा-मर्सिया और मातम के जरिए करबला के शहीदों को याद किया गया।

गाडरवारा। दाऊदी बोहरा जमात गाडरवारा द्वारा हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और करबला के शहीदों की याद में यौम-ए-आशूरा अत्यंत श्रद्धा, अकीदत और गमगीन माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय बोहरा मस्जिद में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
यौम-ए-आशूरा के अवसर पर झंडा चौक से स्थानीय बोहरा मस्जिद तक मक़तल का जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने नोहा और मर्सिया पढ़कर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। पूरे मार्ग में “या हुसैन”, “या अली”, “या अब्बास” के नारों से वातावरण गूंज उठा। समाजजनों ने पुरजोश मातम कर इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की शहादत को याद किया।
करबला की शहादत को किया याद
समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि यौम-ए-आशूरा इस्लामी इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है, जिसे हर वर्ष मोहर्रम माह की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। इसी दिन इराक के करबला में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए यज़ीद की सेना का सामना करते हुए अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी थी। उनकी यह कुर्बानी आज भी मानवता, सत्य और इंसाफ के लिए संघर्ष का संदेश देती है।
बड़ी संख्या में शामिल हुए समाजजन
कार्यक्रम के दौरान बोहरा मस्जिद में विशेष दुआओं और मजलिस का आयोजन किया गया। समाज के लोगों ने करबला के शहीदों को याद करते हुए अमन, भाईचारे और मानव कल्याण की दुआ मांगी। आयोजन में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं सहित बड़ी संख्या में दाऊदी बोहरा समाज के सदस्य उपस्थित रहे।







