पर्युषण के आठवें दिन गाडरवारा में गूंजी उत्तम त्याग धर्म की आराधना
श्री तारण तरण चैत्यालय में भक्तिभाव से संपन्न हुई मंदिर विधि, पं. ओमप्रकाश जैन शास्त्री ने बताया त्याग का आध्यात्मिक मर्म, वीर श्री महिला मंडल ने आयोजित की अंताक्षरी प्रतियोगिता, श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

गाडरवारा। जैन समाज के पर्वराज पर्युषण पर्व के आठवें दिन बुधवार को नगर के श्री तारण तरण चैत्यालय जी में उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। इस दौरान मंदिर विधि सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण भक्तिभाव और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुए। बड़ी संख्या में समाजजनों ने धर्म आराधना में सहभागिता कर आत्मचिंतन एवं संयम का संदेश ग्रहण किया।
बाहरी वस्तुओं का त्याग ही नहीं, ममत्व और कषायों से मुक्ति ही वास्तविक त्याग
धर्मसभा में पंडित ओमप्रकाश जैन शास्त्री ने उत्तम त्याग धर्म के आध्यात्मिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल बाहरी वस्तुओं को छोड़ देना ही सच्चा त्याग नहीं है। वास्तविक उत्तम त्याग तो आत्मा के भीतर बसे ममत्व, राग-द्वेष और कषायों का परित्याग करने में है।
उन्होंने निश्चय त्याग और व्यवहार त्याग का अंतर समझाते हुए कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारी भावों के साथ राग-द्वेष का नाश करना निश्चय से उत्तम त्याग है। जब तक जीव पर-वस्तुओं में ‘यह मेरा है’ का भाव रखता है, तब तक वास्तविक त्याग की अनुभूति नहीं हो सकती।
चार प्रकार के दान को बताया व्यवहार त्याग
पंडित जैन शास्त्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन में अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना भी त्याग की महत्वपूर्ण भावना है। आहार दान, औषधि दान, ज्ञान दान और अभय दान को व्यवहार त्याग बताते हुए उन्होंने कहा कि इन माध्यमों से व्यक्ति परोपकार और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सच्चा त्यागी वही है जो संसार के पदार्थों के प्रति ज्ञाता-दृष्टा भाव रखे। जब जीव यह अनुभव करने लगता है कि ‘मैं शुद्ध आत्मा हूं और धन, संपत्ति तथा शरीर आदि मुझसे भिन्न हैं’, तब त्याग सहज रूप से प्रकट होने लगता है। इसके लिए किसी वस्तु को केवल दिखावे के लिए छोड़ना आवश्यक नहीं है।
महिला मंडल की अंताक्षरी में दिखा उत्साह
पर्युषण पर्व के धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में बीती रात वीर श्री महिला मंडल द्वारा अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। धार्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम ने समाजजनों के बीच उत्साह और आपसी सहभागिता का वातावरण बनाया।







