गाडरवारा: शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार शर्मा सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त, गरिमामय विदाई समारोह आयोजित
गाडरवारा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार शर्मा सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। गरिमामय विदाई समारोह में जनप्रतिनिधियों, शिक्षा अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने उनके योगदान का सम्मान किया।

गाडरवारा, 30 जून। शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों की सुदीर्घ परंपरा को आगे बढ़ाने वाले शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गाडरवारा के प्राचार्य श्री सुशील कुमार शर्मा मंगलवार को अपनी अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर शासकीय सेवा से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में गरिमामय विदाई एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षक, पूर्व विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक थीं, जबकि समारोह की अध्यक्षता नगरपालिका अध्यक्ष पंडित शिवाकांत मिश्रा ने की। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व असिस्टेंट गवर्नर रोटरी श्री मिनेंद्र डागा, श्री एस.के. मिश्रा, नगरपालिका सभापति श्री आनंद दुबे, श्री सुरेंद्र गुर्जर एवं श्री अनूप जैन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद विद्यालय परिवार ने अतिथियों का स्वागत किया तथा श्री शर्मा के लंबे सेवाकाल और विद्यालय में उनके योगदान पर आधारित स्मृतियों का प्रस्तुतीकरण किया।

बालिका शिक्षा और संस्कारों को दी नई दिशा
मुख्य अतिथि श्रीमती साधना स्थापक ने कहा कि एक शिक्षक केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि श्री सुशील कुमार शर्मा ने अपने पूरे सेवाकाल में बालिका शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जिससे हजारों छात्राओं का भविष्य उज्ज्वल हुआ।
सेवानिवृत्ति नई यात्रा की शुरुआत
अध्यक्षीय उद्बोधन में पंडित शिवाकांत मिश्रा ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी कर्मयोगी के जीवन का अंत नहीं, बल्कि अनुभवों के नए अध्याय की शुरुआत होती है। उन्होंने श्री शर्मा के शांत, विनम्र और कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा जगत में उनका योगदान सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

अतिथियों ने किया व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान
पूर्व असिस्टेंट गवर्नर रोटरी मिनेंद्र डागा ने कहा कि श्री शर्मा ने विद्यालय को केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों का मंदिर बनाया।
एस.के. मिश्रा ने उन्हें सादगी, अनुशासन और संवेदनशीलता का प्रतीक बताते हुए कहा कि ऐसे शिक्षक समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं।
आनंद दुबे ने कहा कि शिक्षा और समाज सेवा का जो समन्वय श्री शर्मा ने अपने कार्यकाल में प्रस्तुत किया, वह अनुकरणीय है।
सुरेंद्र गुर्जर ने उनके सहज, सरल और सहयोगी स्वभाव की सराहना की, जबकि अनूप जैन ने विद्यालय के विकास और प्रशासनिक दक्षता में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
सम्मान से भावुक हुए श्री शर्मा
समारोह में विद्यालय परिवार, शिक्षकों, कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने श्री शर्मा का शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ, स्मृति-चिह्न एवं अभिनंदन-पत्र भेंट कर सम्मान किया।
अपने संबोधन में श्री सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षा उनके लिए केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का मिशन रही है। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवनभर मिला स्नेह और सम्मान ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और संस्कारों का विकास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और उपस्थित नागरिकों ने श्री शर्मा के स्वस्थ, सुखमय एवं सक्रिय जीवन की कामना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।







