अस्पताल परिसर में सड़ रहे जनसेवा के वाहन, रेडक्रॉस का शव वाहन कबाड़ में तब्दील
ई-एम्बुलेंस ऑटो भी लंबे समय से बंद, लाखों रुपये की लागत से मिले वाहनों का नहीं हो रहा उपयोग; स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों पर उठे सवाल

गाडरवारा। आम जनता की सुविधा और मानव सेवा के उद्देश्य से उपलब्ध कराए गए वाहन यदि रखरखाव के अभाव में अस्पताल परिसर में ही कबाड़ बन जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही नजारा गाडरवारा के शासकीय चिकित्सालय परिसर में देखने को मिल रहा है, जहां रेडक्रॉस सोसायटी का शव वाहन और मरीजों की स्थानीय आवाजाही के लिए उपलब्ध कराया गया ई-एम्बुलेंस ऑटो लंबे समय से अनुपयोगी पड़े हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय चिकित्सालय परिसर में रेडक्रॉस सोसायटी का शव वाहन काफी लंबे समय से एक ही स्थान पर खड़ा है। देखरेख और रखरखाव के अभाव में वाहन की हालत बदतर हो चुकी है। इसके टायर पंचर हो गए हैं, बॉडी में जंग लग चुकी है और वाहन पर धूल की मोटी परत जम गई है। हालत यह है कि कभी जरूरतमंद परिवारों के लिए उपयोगी रहा यह वाहन अब खुद मरम्मत और देखरेख का इंतजार कर रहा है।
इसी तरह राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा सांसद निधि से गाडरवारा चिकित्सालय को मरीजों की सेवा के लिए उपलब्ध कराया गया लोकल ई-एम्बुलेंस ऑटो भी लंबे समय से अस्पताल परिसर में खड़ा है। स्थानीय स्तर पर मरीजों और जरूरतमंदों को आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से दिया गया यह वाहन भी उपयोग में नहीं आ रहा है।
जनसेवा के साधन बने शोपीस, जिम्मेदारों की अनदेखी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर शासन और प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनसेवा के लिए उपलब्ध कराए गए वाहन अस्पताल परिसर में खड़े-खड़े खराब हो रहे हैं। इन वाहनों पर खर्च की गई राशि का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। आखिर इनकी देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी किसकी है और लंबे समय से बंद पड़े इन वाहनों को चालू कराने के प्रयास क्यों नहीं किए जा रहे हैं?
मरम्मत कराकर दोबारा शुरू हो जनसेवा
क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि रेडक्रॉस सोसायटी के शव वाहन एवं ई-एम्बुलेंस ऑटो की स्थिति की तत्काल जांच कराई जाए। यदि वाहन मरम्मत योग्य हैं तो उन्हें ठीक कराकर दोबारा जनसेवा में लगाया जाए, ताकि जरूरतमंद मरीजों और परिवारों को इनका लाभ मिल सके।
जनसेवा के उद्देश्य से उपलब्ध कराए गए संसाधनों का इस तरह अनुपयोगी पड़े रहना निश्चित ही चिंता का विषय है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक इन वाहनों की सुध लेते हैं।







