नरसिंहपुर में मिड-डे मील खाने से 38 बच्चे बीमार! समनापुर प्राथमिक शाला में मचा हड़कंप, जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चे
रात के बचे आटे से सुबह बनाई गई थीं पूरियां, खट्टे आटे से फूड पॉइजनिंग की आशंका; कलेक्टर रजनी सिंह और एसपी डॉ. ऋषिकेश मीणा पहुंचे अस्पताल, स्वसहायता समूह को हटाने के निर्देश

नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले से बच्चों की सेहत और स्कूलों में वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। समनापुर प्राथमिक शाला में मध्यान्ह भोजन खाने के बाद करीब 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी शिकायतें होने पर आनन-फानन में नरसिंहपुर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुबह बच्चों के लिए पूरियां बनाने में रात के बचे हुए आटे का इस्तेमाल किया गया था। बताया जा रहा है कि आटा खट्टा हो चुका था। इसी आटे से बनी पूरियां खाने के बाद कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। घटना के बाद स्कूल परिसर से लेकर जिला अस्पताल तक हड़कंप की स्थिति बन गई।
अस्पताल पहुंचीं कलेक्टर और एसपी, बच्चों का जाना हाल
घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर रजनी सिंह और पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और चिकित्सकों से उपचार की स्थिति के संबंध में चर्चा की।
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच के आधार पर एकता स्वसहायता समूह समनापुर को हटाने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, संबंधित समूह को पहले भी चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।
अधिकांश बच्चों की हालत स्थिर, डॉक्टरों की निगरानी में उपचार
अधिकारियों के अनुसार, स्कूल में घटना के समय 38 बच्चे उपस्थित थे। इनमें से 34 बच्चों को जिला अस्पताल लाया गया। करीब 10 बच्चों में सिरदर्द, उल्टी और पेट संबंधी शिकायतें सामने आईं, जबकि अन्य बच्चों की स्थिति सामान्य बताई गई। चिकित्सकों द्वारा बच्चों को आवश्यक दवाइयां दी गई हैं।
प्रारंभिक जांच में भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए आटे की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। हालांकि, बच्चों के बीमार होने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बड़ा सवाल: बच्चों की थाली में लापरवाही पर जिम्मेदार कौन?
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि रात का बचा हुआ या खराब हो चुका आटा सुबह बच्चों के भोजन में इस्तेमाल किया गया, तो यह महज लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
अब सवाल यह है कि क्या मध्यान्ह भोजन की नियमित जांच केवल कागजों तक सीमित है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और भोजन बनाने वाले समूहों की जवाबदेही तय होगी? बच्चों की सेहत से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।







