गाडरवारा: त्योहार आते ही नींद से जागता है खाद्य विभाग! बाकी 11 महीने किसकी शह पर चलता है मिलावट और लापरवाही का खेल?
मिठाई-मावे पर मौसमी छापेमारी, लेकिन सालभर बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर सवालिया निशान; होटलों में घरेलू गैस के इस्तेमाल पर भी प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी, आखिर किसे बचा रहा जिम्मेदार महकमा?

गाडरवारा। त्योहार आते ही खाद्य सुरक्षा विभाग अचानक हरकत में आ जाता है। अधिकारियों की टीमें बाजारों में निकलने लगती हैं, मिठाई की दुकानों पर छापेमारी होती है, मावा, पनीर, घी और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं। कार्रवाई की खबरें और विभाग की सक्रियता सुर्खियों में दिखाई देने लगती हैं। लेकिन जैसे ही त्योहार गुजरते हैं, क्या विभाग की जिम्मेदारियां भी खत्म हो जाती हैं? क्या मिलावटखोरी केवल त्योहारों के कुछ दिनों तक ही सीमित रहती है? या फिर बाकी साल आम जनता की सेहत भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है?
यह सवाल अब गाडरवारा सहित पूरे नरसिंहपुर जिले के आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बनना चाहिए। आखिर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी केवल त्योहारों के आसपास ही क्यों दिखाई देती है? क्या साल के बाकी दिनों में बाजारों में बिकने वाला दूध, पनीर, घी, खाद्य तेल और अन्य सामग्री स्वतः शुद्ध हो जाती है?
जनता की थाली में क्या परोसा जा रहा है, इसकी जिम्मेदारी किसकी?
आज महंगाई से जूझ रहा आम परिवार बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों और परिवार के लिए दूध, घी, पनीर तथा अन्य खाद्य सामग्री खरीदता है। लेकिन उसे यह भरोसा कौन दिलाएगा कि उसकी थाली में पहुंचने वाला सामान सुरक्षित और शुद्ध है? यदि कोई परिवार अनजाने में मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थ का सेवन कर रहा है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ त्योहारों पर दुकानों के नमूने लेने और प्रेस विज्ञप्तियां जारी करने तक सीमित नहीं हो सकती। जनता को फोटो खिंचवाने वाली कार्रवाई नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण, जांच रिपोर्ट और दोषियों पर वास्तविक दंडात्मक कार्रवाई चाहिए।
होटलों में घरेलू गैस का इस्तेमाल, जिम्मेदार विभागों की आंखें क्यों बंद?
गाडरवारा के होटल और रेस्टोरेंट भी जांच के दायरे में आने चाहिए। स्थानीय स्तर पर कई प्रतिष्ठानों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यदि घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है तो संबंधित जिम्मेदार विभागों ने अब तक कितनी जांच की? कितने प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई? कितने सिलेंडर जब्त किए गए?
क्या प्रशासन को यह दिखाई नहीं देता या फिर ऐसे मामलों में कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति ही नहीं है? घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं के अधिकारों और आपूर्ति व्यवस्था से भी जुड़ा गंभीर विषय है। इस पर खाद्य विभाग के साथ संबंधित गैस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भी जवाब देना चाहिए।
क्या त्योहारों की छापेमारी सिर्फ दिखावे तक सीमित है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभाग को त्योहारों पर मिलावट की आशंका रहती है तो आम दिनों में वही आशंका क्यों नहीं रहती? क्या मिलावटखोर त्योहार खत्म होते ही अपना कारोबार बंद कर देते हैं? क्या होटलों और खाद्य प्रतिष्ठानों में नियमों का पालन अपने आप होने लगता है?
यदि ऐसा नहीं है तो फिर नियमित निरीक्षण का रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? कितने प्रतिष्ठानों की जांच हुई, कितने नमूने लिए गए, कितने नमूने अमानक पाए गए और कितने मामलों में दोषियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई हुई, इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि आखिर कब लेंगे जवाबदेही?
जिला प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों को अब इन सवालों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। केवल त्योहारों के समय सक्रियता दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेना जनता के स्वास्थ्य के साथ न्याय नहीं है।
जिला प्रशासन को गाडरवारा सहित जिलेभर में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कराने, घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग की जांच कराने और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता है। जिन प्रतिष्ठानों में मिलावट या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
आखिर जनता पूछ रही है—क्या खाद्य सुरक्षा विभाग का कैलेंडर केवल त्योहारों पर ही खुलता है? क्या आम दिनों में मिलावटखोरों और नियम तोड़ने वालों को खुली छूट है? और क्या प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई का दावा करने तक रह गई है?
जनता को मौसमी छापेमारी नहीं, 365 दिन निगरानी चाहिए। उसे अधिकारियों के आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए। क्योंकि सवाल किसी एक दुकान, होटल या अधिकारी का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सेहत और सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।
अब प्रशासन को तय करना होगा कि वह जनता की सेहत की रक्षा करेगा या त्योहारों के बाद फिर उसी पुरानी खामोशी में लौट जाएगा!







