गरीब फुटकर विक्रेताओं पर प्रशासन की सख्ती, बड़े शोरूमों के अतिक्रमण पर चुप्पी क्यों?
सड़क तक सज रहे टेंट-पंडाल और फैल रहा कारोबार, छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई से नगर प्रशासन की दोहरी नीति पर उठे सवाल

सालीचौका, नरसिंहपुर। (अवधेश चौकसे)
त्योहारी सीजन में अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर प्रशासन की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। एक ओर फुटपाथ पर सब्जी, फल और छोटी-मोटी सामग्री बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले गरीब फुटकर विक्रेताओं को नोटिस देकर हटाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़े शोरूम और प्रतिष्ठानों के सामने सड़क तक टेंट-पंडाल लगाकर सामान की बिक्री की जा रही है। ऐसे में नगर प्रशासन की कार्रवाई में कथित भेदभाव को लेकर नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फुटपाथ और सड़क पर सामान रखना अतिक्रमण की श्रेणी में आता है, तो फिर बड़े प्रतिष्ठानों के सामने सड़क तक फैले टेंट-पंडाल और बिक्री के सामान पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ रही? जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानों पर टेंट लगाने के लिए सड़क किनारे गड्ढे तक खोदे गए हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
क्या अतिक्रमण के नियम सिर्फ गरीबों के लिए हैं?
नगर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर आम नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या अतिक्रमण के नियम छोटे दुकानदारों पर ही लागू होते हैं? यदि सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराना प्रशासन की प्राथमिकता है, तो फिर बड़े शोरूम संचालकों को भी समान नियमों के दायरे में क्यों नहीं लाया जा रहा?
गरीबों की आजीविका का भी हो संरक्षण
शहर को व्यवस्थित रखना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में उन गरीब परिवारों की आजीविका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जो फुटकर व्यवसाय के सहारे अपना जीवन चलाते हैं। नगर प्रशासन को चाहिए कि फुटकर विक्रेताओं के लिए व्यवस्थित हॉकर्स जोन बनाया जाए और अतिक्रमण के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के समान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल नगर प्रशासन से है कि क्या सड़क और फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम सभी के लिए समान होगी या फिर छोटे दुकानदारों पर ही कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा? शहर को व्यवस्थित करना है तो नियमों का पालन भी सभी को करना होगा, चाहे दुकानदार छोटा हो या बड़ा।







