शराब दुकानों में खुली लूट के आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं; आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
एमआरपी से अधिक वसूली, बिल मांगने पर अभद्रता के आरोप; विभाग बोला- जांच कराएंगे, लेकिन अब तक क्यों नहीं हुई पड़ताल?

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
शाहपुर। बैतूल जिले के शाहपुर, मोतीढ़ाना, पतौवापुरा और भौंरा अंग्रेजी शराब दुकानों पर कथित ओवररेटिंग और ग्राहकों से दुर्व्यवहार के आरोपों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सुराप्रेमियों का आरोप है कि दुकानों पर निर्धारित मूल्य (एमआरपी) से 50 से 60 रुपये तक अधिक राशि वसूली जा रही है और बिल मांगने पर कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है। गंभीर बात यह है कि लंबे समय से इस तरह की शिकायतें सामने आने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
एमआरपी कुछ और, वसूली कुछ और!
ग्राहकों के अनुसार 120 रुपये मूल्य वाली शराब की बोतल 150 रुपये में बेची जा रही है। वहीं फॉक्स ब्रांड के हाफ की कीमत 390 से 450 रुपये के बीच होने के बावजूद उससे 500 रुपये तक वसूले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। अतिरिक्त राशि लेने के बाद भी कई ग्राहकों को बिल नहीं दिए जाने की शिकायत सामने आई है।
लेना है तो लो, नहीं तो खिसक जाओ
नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कई ग्राहकों ने बताया कि जब वे निर्धारित मूल्य और बिल की मांग करते हैं तो कर्मचारियों का रवैया आक्रामक हो जाता है। ग्राहकों का आरोप है कि उन्हें कहा जाता है, “लेना है तो लो, नहीं तो खिसक जाओ, रेट बढ़ गया है।” विरोध करने पर शराब नहीं देने की धमकी तक दी जाती है।
रोजाना विवाद, फिर भी विभाग क्यों नहीं जागा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब दुकानों पर आए दिन ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच बहस और विवाद की स्थिति बनती है। यदि हालात इतने गंभीर हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कर क्या रही है? विभागीय अमले द्वारा नियमित निरीक्षण किए जाने के दावों के बावजूद यदि ओवररेटिंग के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जा रही है।
शिकायतें पुरानी, कार्रवाई अब भी अधूरी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं है। लंबे समय से शराब दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने की चर्चाएं होती रही हैं। इसके बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग अब तक ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है तो इससे विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। लोगों का आरोप है कि शिकायतें होने के बाद भी यदि जांच नहीं होती, तो इससे गलत संदेश जाता है और अनियमितताओं को बढ़ावा मिलता है।
जिला आबकारी अधिकारी बोले- शिकायत मिली तो जांच होगी
मामले में जिला आबकारी अधिकारी अंशुमान चढ़ार ने कहा, मुझे जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार दुकानों पर सही दरों पर ही बिक्री की जा रही है। यदि इस प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं और आप बता रहे हैं तो मैं पूरे मामले की जांच करवाता हूं। जांच में यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि अधिकारी के इस बयान के बाद भी एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से ओवररेटिंग और बिल नहीं देने जैसी शिकायतें चर्चा का विषय बनी हुई हैं, तो विभाग को इसकी जानकारी अब तक क्यों नहीं मिली? और यदि शिकायतें पहले से थीं तो स्वतः संज्ञान लेकर जांच क्यों नहीं की गई?
सीसीटीवी, स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड की जांच की मांग
ग्राहकों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शाहपुर, मोतीढ़ाना, पतौवापुरा और भौंरा की शराब दुकानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दुकानों के सीसीटीवी फुटेज, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड और बिलिंग व्यवस्था की पड़ताल की जाए तथा यदि एमआरपी से अधिक वसूली और बिल नहीं देने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के साथ-साथ निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
बड़ा सवाल
यदि दुकानों पर सब कुछ नियमानुसार चल रहा है तो फिर ओवररेटिंग और अभद्रता की शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं? और यदि शिकायतें सही हैं, तो आबकारी विभाग अब तक कार्रवाई से दूर क्यों रहा? यह सवाल अब सिर्फ शराब दुकानों पर नहीं, बल्कि पूरे विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर खड़ा हो गया है।







