मध्य प्रदेश

अखिल भारतीय साहित्य सम्मान एवं कृति विमोचन समारोह संपन्न, देशभर के साहित्यकार हुए सम्मानित

चेतना साहित्य मंच द्वारा गाडरवारा में आयोजित अखिल भारतीय साहित्य सम्मान एवं कृति विमोचन समारोह में देशभर के साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की चार कृतियों सहित पांच पुस्तकों का विमोचन हुआ।

गाडरवारा। चेतना साहित्य मंच के तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय साहित्य सम्मान एवं कृति विमोचन समारोह स्थानीय कॉलेज ऑडिटोरियम में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं पूर्व विधायक श्रीमती साधना स्थापक, रोटेरियन मिनेन्द्र डागा, श्रीमती अभिलाषा शर्मा एवं नवोदियन हरीश कोरी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती वंदना की प्रस्तुति सुनील तन्हा ने दी।

पांच साहित्यिक कृतियों का हुआ विमोचन

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की चार कृतियों— श्याम टॉकीज, पुरानी गल्ला मंडी, सोमवार सात अगस्त (कहानी संग्रह) तथा खसुआ (उपन्यास) का विमोचन किया गया। इसके साथ ही अभिलाषा शर्मा की कृति अभिव्यक्ति का भी लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।

चेतना साहित्य मंच के संरक्षक मिनेन्द्र डागा ने स्वागत भाषण में कहा कि गाडरवारा ओशो की ऊर्जा और मां नर्मदा के आंचल से सिंचित साहित्यिक भूमि है, जहां साहित्य के प्रति सदैव विशेष उत्साह देखने को मिलता है।

साहित्यकारों ने प्रस्तुत की कृतियों की समीक्षा

कार्यक्रम में वेणी शंकर पटैल ने कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की नवीन कृतियों की समीक्षा प्रस्तुत की, वहीं श्रीमती अनुराधा यादव ने अभिलाषा शर्मा की पुस्तक अभिव्यक्ति पर अपने विचार रखे। समीक्षकों ने कृतियों की विषयवस्तु, भाषा शैली और सामाजिक सरोकारों की सराहना की।

ज्ञात हो कि वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की अब तक 67 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

साहित्य में मौलिकता बनाए रखने की अपील

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि श्याम टॉकीज और पुरानी गल्ला मंडी कहानी संग्रह गाडरवारा के अतीत का जीवंत दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों का दायित्व केवल लेखन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पाठकों को भी साहित्य से जोड़ना आवश्यक है।

उन्होंने आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में साहित्य की मौलिकता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया।

साधना स्थापक ने स्वाध्याय का दिया संदेश

मुख्य अतिथि श्रीमती साधना स्थापक ने कृतिकारों को बधाई देते हुए कहा कि गाडरवारा साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र है। उन्होंने सभी को नियमित अध्ययन और स्वाध्याय की आदत विकसित करने की प्रेरणा दी तथा कहा कि साहित्य और धर्मग्रंथ जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

देशभर के साहित्यकारों को मिला अखिल भारतीय साहित्य सम्मान

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों को विभिन्न साहित्यिक विधाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए अखिल भारतीय चेतना साहित्य सम्मान प्रदान किए गए।

प्रमुख सम्मान इस प्रकार रहे—

  • स्व. श्रीमती प्रतिभा श्रीवास्तव समग्र साहित्य सम्मान – डॉ. ब्रजलता मिश्रा (झांसी)
  • स्व. प्रेमनारायण त्रिपाठी चेतना साहित्य सम्मान (उपन्यास) – प्रो. डॉ. जश भाई (गुजरात) – मौत की देवी
  • स्व. रमेश गुप्ता साहित्य सम्मान (युवा कवि) – स्वाति शर्मा (नोएडा) – काव्य सुधा
  • स्व. रामसागर स्वामी साहित्य सम्मान (कहानी संग्रह) – डॉ. अनीता सिंह चौहान (भोपाल) एवं राकेश माहेश्वरी (नरसिंहपुर)
  • स्व. जगदीश पाटकर साहित्य सम्मान – प्रो. डॉ. मनोज कुमार (दिल्ली) – संशय के दिन
  • स्व. रूपराम सोनी साहित्य सम्मान (ग़ज़ल संग्रह) – जीनत अहसान कुरैशी (मुंबई)
  • स्व. रेवाप्रसाद नेमा साहित्य सम्मान (बाल साहित्य) – देवेंद्र श्रीवास्तव (बस्ती, उत्तर प्रदेश)
  • स्व. श्रीराम साहू साहित्य सम्मान – निरूपमा खरे (भोपाल)
  • स्व. हुल्कर सिंह साहित्य सम्मान – सीमा गर्ग (मेरठ)
  • स्व. प्रभुदयाल खरे स्मृति साहित्य सम्मान – डॉ. एम.एस. श्रीवास्तव एवं डॉ. राजगोस्वामी
  • स्व. मुन्नीबाई सोनी साहित्य सम्मान – मीना भट्ट एवं सिद्धेश्वरी सराफ
  • स्व. गंगादेवी साहित्य सम्मान – डॉ. नीना छब्बर (जोधपुर)
  • स्व. विमला देवी शर्मा साहित्य चेतना सम्मान – पद्माक्षी सुरेश शुक्ला

सभी सम्मानित साहित्यकारों को ₹3100 की नगद राशि, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।

वीरांगना क्लब की प्रतिभाओं का भी हुआ सम्मान

कार्यक्रम में वीरांगना क्लब की बालिकाओं को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही चेतना साहित्य मंच के सहयोगियों और साहित्यिक गतिविधियों में योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में देशभर से आए साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अंत में नगेन्द्र त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया, जबकि मंच संचालन विजय बेशर्म ने किया।

 

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