मध्य प्रदेश

रेगुलर छात्र को प्राइवेट बनाकर भविष्य से खिलवाड़! मॉडल स्कूल शाहपुर में बीआरसी पर मनमानी और पक्षपात के आरोप

एडमिट कार्ड रेगुलर, फिर भी रिजल्ट प्राइवेट; एक साथ थमाए गए एब्सेंट नोटिस, परिजनों ने बीआरसी पर लगाए गंभीर आरोप

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता

शाहपुर। शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला मॉडल हाई स्कूल शाहपुर से सामने आया है। कक्षा 12वीं के छात्र निहाल प्रजापति को पूरे साल नियमित रूप से स्कूल आने और रेगुलर एडमिट कार्ड जारी होने के बावजूद परीक्षा परिणाम में प्राइवेट घोषित कर दिया गया। इस फैसले से छात्र के प्रोजेक्ट के अंक खत्म हो गए और उसका कुल प्रतिशत गिरकर 47% तक पहुंच गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल प्रबंधन और बीआरसी स्तर पर भी छात्र के नियमित होने की बात स्वीकार की जा रही है, फिर भी उसे बिना किसी पूर्व सूचना के प्राइवेट श्रेणी में डाल दिया गया। इससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

बीआरसी पर मनमानी और पक्षपात के आरोप

इस पूरे मामले के केंद्र में बीआरसी राधेलाल भादे का नाम सामने आ रहा है, जो वर्तमान में बीआरसी के साथ-साथ मॉडल स्कूल शाहपुर के प्रभारी का भी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि यह कोई साधारण गलती नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से छात्र को टारगेट किया गया।
छात्र की बड़ी बहन सलोनी प्रजापति का आरोप है कि बीआरसी से उनके व्यक्तिगत मतभेद हैं और उसी का खामियाजा उनके भाई को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत द्वेष के चलते छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।

एक साथ थमाए गए एब्सेंट नोटिस

मामले को और संदिग्ध तब बना देता है जब तथाकथित अनुपस्थिति के नोटिस सामने आते हैं।
बताया जा रहा है कि 1 सितंबर, 1 अक्टूबर और 10 जनवरी के एब्सेंट नोटिस छात्र को 29 जनवरी को एडमिट कार्ड के साथ एक साथ थमा दिए गए।
हैरानी की बात यह है कि:
पहले कभी अभिभावकों को इसकी जानकारी नहीं दी गई
नोटिस पर छात्र के हस्ताक्षर भी नहीं हैं
किसी भी माध्यम से अनुपस्थिति की सूचना नहीं दी गई
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि छात्र वास्तव में अनुपस्थित था, तो स्कूल प्रबंधन ने समय रहते अभिभावकों को सूचित क्यों नहीं किया?

छात्र को मानसिक प्रताड़ना के भी आरोप

परिजनों का आरोप है कि छात्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसे हतोत्साहित करने वाली बातें भी कही गईं। इससे छात्र और परिवार दोनों मानसिक तनाव में हैं।

जांच की उठी मांग

अब यह मामला केवल एक छात्र के रिजल्ट का नहीं रहा, बल्कि शिक्षा विभाग की पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है।

परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करने को मजबूर होंगे।

अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करते हैं

इनका कहना

निहाल प्रजापति के मामले में परिजनों द्वारा जो आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं वह निराधार है

राधेलाल माथे
शासकीय माडल स्कूल प्राचार्य एवं
बीआरसी शाहपुर

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