नरसिंहपुर: फर्जी IAS बनकर महिला डॉक्टर को बनाया निशाना, करीब 3 लाख की ठगी के बाद वाराणसी से आरोपी गिरफ्तार; AI फोटो से बनाता था रौब

नरसिंहपुर। ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए रिश्ते का भरोसा कायम कर महिला चिकित्सक से करीब 3 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में नरसिंहपुर पुलिस ने एक आरोपी को वाराणसी से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान संजय कुमार निवासी बभनौती, जिला भदोही, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आरोपी ने महिला डॉक्टर के सामने अपनी पहचान एक डॉक्टर और IAS अधिकारी के रूप में पेश की। उसने अपनी शैक्षणिक योग्यता और सरकारी पद को लेकर कई दावे किए और इन्हीं दावों के जरिए महिला का विश्वास हासिल किया।
जीवनसाथी डॉट कॉम से शुरू हुआ संपर्क
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने जीवनसाथी डॉट कॉम के माध्यम से महिला डॉक्टर से संपर्क किया था। ऑनलाइन बातचीत के दौरान उसने खुद को डॉक्टर बताया और दावा किया कि उसने MBBS, MD और DM जैसी उच्च चिकित्सा शिक्षा हासिल की है।
इतना ही नहीं, आरोपी ने कथित तौर पर महिला को यह भी बताया कि उसका UPSC में चयन हुआ है, उसे मध्यप्रदेश कैडर मिला है और वह धार में SDM के पद पर पदस्थ है।
इन दावों के कारण महिला चिकित्सक आरोपी को एक पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित सरकारी अधिकारी के रूप में देखने लगी। पुलिस जांच के अनुसार इसी विश्वास का फायदा उठाकर आरोपी ने आर्थिक धोखाधड़ी की।

AI और फोटो एडिटिंग से तैयार करता था ‘अधिकारी’ वाली छवि
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की कथित डिजिटल गतिविधियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार आरोपी AI तकनीक और फोटो एडिटिंग का इस्तेमाल कर ऐसी तस्वीरें तैयार करता था, जिनमें वह वरिष्ठ अधिकारियों अथवा सरकारी संस्थानों से जुड़ा हुआ दिखाई देता था।
इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर इस्तेमाल कर वह अपने बारे में एक प्रभावशाली और विश्वसनीय छवि बनाने की कोशिश करता था।
यानी ऑनलाइन पहचान को मजबूत करने के लिए केवल मौखिक दावे ही नहीं, बल्कि डिजिटल तस्वीरों और सोशल मीडिया प्रोफाइल का भी इस्तेमाल किया जा रहा था।
गांव और परिवार को भी बताता था खुद को IAS
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आने की जानकारी है। आरोपी कथित तौर पर अपने गांव और परिजनों के बीच भी लंबे समय से खुद को IAS अधिकारी बताकर भ्रम की स्थिति बनाए हुए था।
इससे पुलिस को यह आशंका भी हुई है कि आरोपी ने अपनी फर्जी पहचान को केवल ऑनलाइन रिश्ते तक सीमित नहीं रखा था, बल्कि अपने आसपास के लोगों के बीच भी इसी पहचान को स्थापित कर रखा था।

तकनीकी साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों और पतासाजी के आधार पर आरोपी की लोकेशन एवं गतिविधियों का पता लगाया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी को वाराणसी से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण आरोपी की डिजिटल और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ा है।
बैंक खाते और डिजिटल उपकरणों की जांच जारी
पुलिस द्वारा आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि महिला चिकित्सक से हुई कथित धोखाधड़ी के अलावा आरोपी ने कहीं और भी इसी तरह की गतिविधियों को अंजाम तो नहीं दिया।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अन्य महिलाओं या लोगों से मैट्रिमोनियल साइट, सोशल मीडिया अथवा फर्जी सरकारी पहचान के जरिए संपर्क किया था या नहीं।
ऑनलाइन रिश्तों में बढ़ रहा पहचान का जोखिम
यह मामला ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए बिना भरोसा करने के जोखिम को भी सामने लाता है। प्रोफाइल पर लिखी शैक्षणिक योग्यता, नौकरी, सरकारी पद या सोशल मीडिया पर मौजूद तस्वीरें अपने आप में किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं होतीं।
खासकर जब कोई व्यक्ति खुद को IAS, IPS, डॉक्टर या किसी अन्य प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत बताता है, तो उसकी पहचान और पद की स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि करना जरूरी है।
पुलिस की नागरिकों से अपील
नरसिंहपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट अथवा सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति को धनराशि, बैंक खाते की जानकारी, OTP अथवा अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि ऑनलाइन ठगी या संदिग्ध साइबर गतिविधि का मामला सामने आता है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस आरोपी के डिजिटल एवं वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी पहचान के जरिए आरोपी ने महिला चिकित्सक के अलावा और कितने लोगों को निशाना बनाया था।







