बच्चों के पैरों में कीचड़, जिम्मेदारों के दावों पर सवाल! कैकरा की शर्मनाक तस्वीर
60 घरों का गांव, 50-60 स्कूली बच्चे और करीब 4 किलोमीटर का बदहाल रास्ता; ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब जागेगा प्रशासन?

गाडरवारा। एक तरफ सरकार गांव-गांव विकास और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के दावे करती है, वहीं गाडरवारा के समीपी ग्राम पंचायत बरहटा के कैकरा गांव की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में करीब 20 वर्षों से पक्की सड़क का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन आज तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
सबसे गंभीर स्थिति उन 50 से 60 स्कूली बच्चों की है, जिन्हें ग्रामीणों के मुताबिक रोजाना इसी बदहाल कच्चे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। सवाल यह है कि जब बच्चों के लिए सड़क जैसी बुनियादी सुविधा भी वर्षों से उपलब्ध नहीं हो सकी, तो गांवों के विकास के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत आखिर क्या है?
20 साल में नहीं बन सकी सड़क, हर साल ग्रामीण ही लगाते हैं पैसा
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगभग 60 घर हैं, लेकिन सड़क की समस्या दो दशक बाद भी जस की तस बनी हुई है। गांव से मुख्य सड़क करीब 4 किलोमीटर दूर बताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता खराब होने पर उन्हें शासन की मदद का इंतजार करने के बजाय खुद चंदा जुटाकर सड़क की मरम्मत करवानी पड़ती है। यानी जिस रास्ते की जिम्मेदारी व्यवस्था की होनी चाहिए, उसकी मरम्मत का बोझ भी ग्रामीणों को ही उठाना पड़ रहा है—यह स्थिति ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है।
बच्चों की मजबूरी पर जिम्मेदारों की चुप्पी?
बदहाल रास्ते से स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। बारिश या खराब मौसम में रास्ते की स्थिति और कठिन होने की बात ग्रामीणों ने कही है।
ग्रामीणों का सवाल है कि क्या 50-60 बच्चों के सुरक्षित आवागमन के लिए भी 20 साल तक इंतजार करना पड़ेगा? क्या संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक यह समस्या नहीं पहुंची? अगर पहुंची तो अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
बिजली के लिए 2 किलोमीटर दूर से खींची डोरी
ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायत की है। उनका कहना है कि करीब 2 किलोमीटर दूर से डोरी खींचकर बिजली लाई गई है और इसके बावजूद बिजली के बिल नियमित रूप से जमा किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। नल-जल की समस्या भी गांव में बनी हुई है।
सरकारी योजनाएं कागज पर या गांव की जमीन पर?
ग्रामीणों ने विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ परिवारों को आवास योजना का लाभ नहीं मिला, वहीं राशन कार्ड को लेकर भी समस्याएं हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि गांव के पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा है तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या योजनाओं की निगरानी केवल कागजों तक सीमित है या वास्तव में गांव तक जाकर स्थिति की जांच भी की जाती है?
चुनाव के समय आश्वासन, बाद में वही पुरानी कहानी!
ग्रामीणों के अनुसार चुनाव के दौरान सड़क और नल-जल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के आश्वासन दिए गए थे। ग्रामीणों का दावा है कि चुनाव बीतने के बाद भी उनकी समस्याएं वहीं की वहीं हैं।
वादा विकास का, इंतजार 20 साल का—कैकरा के ग्रामीणों की यही सबसे बड़ी शिकायत है।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
कैकरा की स्थिति केवल सड़क की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े कई सवाल सामने लाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था और पेयजल समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब देखना यह होगा कि वर्षों से परेशान ग्रामीणों की आवाज प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचती है या कैकरा की सड़क और ग्रामीणों की समस्याएं एक बार फिर सरकारी फाइलों और आश्वासनों के बीच दबकर रह जाती हैं।







