साहित्यकार सुशील शर्मा को मिला प्रतिष्ठित टी.आर. नेमा साहित्य सम्मान, एम.आई.एम.टी. के स्थापना दिवस समारोह में हुए सम्मानित
हिंदी साहित्य, शिक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए मिला सम्मान

गाडरवारा/नरसिंहपुर। एम.आई.एम.टी. कॉलेज, नरसिंहपुर के 28वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर शिक्षा, साहित्य, चिकित्सा, कृषि, समाजसेवा, पत्रकारिता, खेल, विधि, अभियंत्रिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि देश के प्रख्यात पत्रकार एवं चिंतक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक पंडित मैथिलीशरण तिवारी उपस्थित रहे। मंच पर एम.आई.एम.टी. के संचालक रुद्रेश तिवारी एवं प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार गर्ग भी मौजूद रहे।
साहित्य साधना को मिला सम्मान
समारोह का मुख्य आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य सुशील शर्मा को प्रदान किया गया “श्री टी.आर. नेमा साहित्य सम्मान” रहा। यह सम्मान उन्हें हिंदी साहित्य के संवर्धन, शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में सुशील शर्मा ने कहा कि एम.आई.एम.टी. संस्था केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने संस्था के इस प्रयास को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की।
27 वर्षों की यात्रा को किया याद
एम.आई.एम.टी. के संचालक रुद्रेश तिवारी ने अपने संबोधन में संस्था की स्थापना से लेकर अब तक की 27 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि नरसिंहपुर की जनता के विश्वास, सहयोग और स्नेह के कारण ही संस्था आज इस मुकाम तक पहुंच सकी है।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
विशिष्ट अतिथि पंडित मैथिलीशरण तिवारी ने संस्था के शुरुआती संघर्षों और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एम.आई.एम.टी. आज जिले की पहचान बन चुकी है और यह समाज की साझा उपलब्धि है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कैलाश सोनी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने एम.आई.एम.टी. को विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण की पाठशाला बताया।
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर की चिंता
मुख्य अतिथि पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती संस्कारों और नैतिक मूल्यों से बढ़ती दूरी है। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता है जो शिक्षा को उसके मूल उद्देश्य से जोड़ें और विद्यार्थियों में नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी तथा राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करें।
उन्होंने एम.आई.एम.टी. के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था शिक्षा के साथ संस्कारों को भी समान महत्व देकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे गणमान्य नागरिक
स्थापना दिवस समारोह में जिले के शिक्षाविद, साहित्यकार, समाजसेवी, चिकित्सक, पत्रकार, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान कर उनके योगदान को सराहा गया।
गरिमामय माहौल में संपन्न हुए इस समारोह ने शिक्षा, साहित्य और सामाजिक मूल्यों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया तथा उपस्थित लोगों को प्रेरणा प्रदान की।







