गाडरवारा में 30 दिवसीय राष्ट्रीय अभिनय नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ, देशभर से पहुंचे युवा कलाकार

गाडरवारा। कला और संस्कृति के क्षेत्र में गाडरवारा को एक बड़ी सौगात मिली है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली एवं रंगसरोकार नाट्य समिति, नरसिंहपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय राष्ट्रीय अभिनय नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ एनटीपीसी ऑडिटोरियम में हुआ। कार्यशाला का आयोजन कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह एवं प्रख्यात लेखक-अभिनेता आशुतोष राना के विशेष निर्देशन में किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त पूर्व विधायक साधना स्थापक के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष पंडित शिवकांत मिश्रा ने की। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष चंद्रकांत शर्मा, एनएसडी के वरिष्ठ प्रशिक्षक द्वारका दाहिया एवं कार्यशाला निदेशक पुनीत विक्रम त्रिवेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
नटराज पूजन और दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान नटराज के तैलचित्र के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति एवं सांस्कृतिक गीतों से वातावरण गुंजायमान रहा।
कार्यशाला निदेशक पुनीत विक्रम त्रिवेदी ने स्वागत भाषण एवं प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली देश की प्रमुख नाट्य प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक है और इसकी कार्यशालाओं का उद्देश्य नई प्रतिभाओं को निखारना तथा उन्हें अपनी कला के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि अभिनय केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, संवेदना और जीवन को गहराई से समझने की कला है। अगले 30 दिनों में प्रतिभागियों को अभिनय के साथ-साथ आवाज, शरीर भाषा, रंग निर्देशन और रंगमंच की विभिन्न बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गाडरवारा के लिए गौरव का अवसर : शिवकांत मिश्रा
नगर पालिका अध्यक्ष शिवकांत मिश्रा ने कहा कि गाडरवारा जैसे छोटे शहर में राष्ट्रीय स्तर की नाट्य कार्यशाला का आयोजन होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला निश्चित रूप से गाडरवारा की सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से गाडरवारा पहुंचे प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे यहां सिर्फ अभिनय सीखने नहीं, बल्कि गाडरवारा की संस्कृति को भी समृद्ध करने आए हैं।
कला समाज को उसकी जड़ों से जोड़ती है : साधना स्थापक
मुख्य अतिथि साधना स्थापक ने अपने उद्बोधन में कला के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कला मनुष्य को संवेदनशील बनाने के साथ समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है।
उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से गाडरवारा पहुंचकर कार्यशाला में शामिल हुए प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि इतनी दूर से आकर प्रशिक्षण लेना उनके समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के साथ सही दिशा, निरंतर मेहनत और अनुशासन जुड़ जाए तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है।
इस दौरान उन्होंने अभिनेता एवं लेखक आशुतोष राना के उदाहरण का उल्लेख करते हुए युवाओं को निरंतर सीखते रहने और संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटने के लिए प्रेरित किया।
30 दिनों तक अभिनय और रंगमंच की बारीकियां सीखेंगे कलाकार
कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा कलाकार अगले 30 दिनों तक अभिनय एवं रंगमंच की बारीकियों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। एनएसडी के प्रशिक्षक द्वारका दाहिया सहित अन्य विशेषज्ञ प्रतिभागियों को रंगमंच, मंच सज्जा, प्रकाश, ध्वनि और अभिनय की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण देंगे।
इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला से गाडरवारा एवं आसपास के क्षेत्र में रंगमंच और कला से जुड़े युवाओं को भी सीखने तथा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों एवं प्रशिक्षकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
बड़ी संख्या में रंगकर्मी और गणमान्य नागरिक रहे मौजूद
कार्यक्रम के अंत में संयोजक कपिल साहू ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बसंती पालीवाल, अनिल लूनावत, शैलेंद्र जैन, आनंद दूबे, सुरेंद्र गुर्जर, वर्षा तिवारी, पार्षद आरती विश्वकर्मा, सुशील शर्मा सहित बड़ी संख्या में रंगकर्मी, साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।







