सालीचौका में “एक के 80” के लालच से बढ़ी चिंता, युवाओं को बचाने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग
सालीचौका-तेंदूखेड़ा क्षेत्र में तेजी से फैल रही कथित सट्टेबाजी की चर्चा, जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

सालीचौका, नरसिंहपुर | अवधेश चौकसे |
सालीचौका एवं तेंदूखेड़ा क्षेत्र में कथित रूप से “एक के 80” के लालच में लोगों, विशेषकर युवाओं के फंसने की चर्चाओं ने सामाजिक चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों के कारण कई परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ी पर भी पड़ सकता है।
युवाओं पर बढ़ रहा असर
क्षेत्र के लोगों के अनुसार, जल्दी और अधिक पैसा कमाने के लालच में कई युवा कथित सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके चलते कुछ परिवारों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होने की बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की लत से परिवारों में तनाव और कर्ज जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
तीन जिलों की सीमा से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र
सालीचौका और तेंदूखेड़ा क्षेत्र नरसिंहपुर जिले में स्थित हैं तथा रायसेन, सागर, नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा जिलों से जुड़े होने के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी और अन्य लोग आते-जाते हैं। ऐसे में सामाजिक बुराइयों से युवाओं को बचाने के लिए जागरूकता और निगरानी दोनों आवश्यक मानी जा रही हैं।
बेरोजगारी को भी माना जा रहा कारण
स्थानीय लोगों का मानना है कि बेरोजगारी और रोजगार के सीमित अवसर भी युवाओं को आसान कमाई के प्रलोभन की ओर धकेल रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रोजगार और जागरूकता बढ़ाने से ऐसी प्रवृत्तियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
पुलिस अधीक्षक के प्रयासों की सराहना
क्षेत्र के नागरिकों ने नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक द्वारा अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उनका कहना है कि जिले में अपराध नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, लोगों का यह भी कहना है कि स्थानीय स्तर पर निरंतर और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि यदि कहीं इस प्रकार की अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हों तो उन पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
जागरूकता और सख्ती दोनों जरूरी
जागरूक नागरिकों का मानना है कि सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और युवाओं की भी समान भागीदारी आवश्यक है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि क्षेत्र में कहीं भी अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हों तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।







