थानों-चौकियों के सामने से गुजर रही शराब की बोलेरो, फिर भी कार्रवाई नहीं! गांव-गांव सप्लाई पर पुलिस और आबकारी विभाग कठघरे में
सैकड़ों गांवों में शराब पहुंचाने का आरोप, ग्रामीण बोले- जब सबको पता है तो कार्रवाई क्यों नहीं?

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर
शाहपुर। भौंरा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में शराब बिक्री को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब ग्रामीणों ने शराब सप्लाई के पूरे नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि ठेकेदार के लोग बोलेरो वाहनों और मोटरसाइकिलों के जरिए सैकड़ों लीटर शराब गांव-गांव पहुंचा रहे हैं। आरोप है कि यह सप्लाई कोई छिपकर नहीं, बल्कि खुलेआम की जा रही है, लेकिन आज तक न पुलिस ने इन वाहनों को रोकने की गंभीर कोशिश की और न ही आबकारी विभाग ने कोई बड़ी कार्रवाई की।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है, तो उसके पीछे कोई न कोई सप्लाई तंत्र जरूर काम कर रहा है। सवाल यह है कि जब गांवों तक शराब पहुंचने की चर्चा आम है, तब जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही?
बेखौफ दौड़ रही शराब से भरी बोलेरो?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब से भरी बोलेरो और अन्य वाहन नियमित रूप से ग्रामीण इलाकों में पहुंचते हैं और वहां छोटे दुकानदारों aor अन्य स्थानों पर शराब की सप्लाई की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक दिन या एक गांव की बात नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही व्यवस्था है। लोगों का दावा है कि यदि किसी भी दिन अचानक जांच अभियान चलाया जाए तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
थाने-चौकी के सामने से गुजरने के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि शराब से भरे वाहन कई बार पुलिस थानों और चौकियों के सामने से गुजरते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर निगरानी व्यवस्था काम क्यों नहीं कर रही? यदि शराब सप्लाई के आरोप सही हैं, तो यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं यदि आरोप गलत हैं, तो फिर संबंधित विभागों को विशेष अभियान चलाकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
गांव-गांव शराब, लेकिन जिम्मेदार कौन?
बीजादेही, सोनादेह, ढोढरामऊ, डाबरी, बानाबेहड़ा, धपाड़ा,हीरापुर गोलई टेमरु कछार, हांडीपानी, गुरगुंदा, निशाना, पाठई भयावाड़ी देशावाडी मालिसिल्पति और बरजोरपुर सहित अनेक गांवों में शराब उपलब्ध होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शराब केवल अधिकृत दुकानों से ही बिकनी है, तो फिर दूर-दराज के गांवों में इसकी उपलब्धता कैसे हो रही है?
उठ रहे संरक्षण के सवाल
लगातार सामने आ रही शिकायतों और कार्रवाई के अभाव ने ग्रामीणों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब छोटे स्तर पर महुआ या कच्ची शराब के मामलों में तुरंत कार्रवाई हो जाती है, तो गांवों में शराब सप्लाई के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? हालांकि संरक्षण संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने पुलिस और आबकारी विभाग दोनों की जवाबदेही को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
बड़ा सवाल
यदि सैकड़ों गांवों तक शराब पहुंच रही है, तो वह आखिर किस रास्ते से पहुंच रही है? यदि शराब से भरे वाहनों के गांवों में आने-जाने के आरोप सही हैं, तो अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि आरोप गलत हैं, तो पुलिस और आबकारी विभाग जमीनी जांच कर स्थिति साफ क्यों नहीं करते? यही सवाल अब पूरे शाहपुर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।







