नशे के दलदल में धंसता जा रहा गाडरवारा: रोज़ पकड़ी जा रही स्मैक, फिर भी जारी सप्लाई; आखिर बड़ी मछलियों पर कब कसेगा शिकंजा?
गाडरवारा में लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद नहीं टूट रहा नेटवर्क, युवाओं का भविष्य दांव पर; जनता पूछ रही- आखिर मुख्य सरगना कौन?

गाडरवारा, नरसिंहपुर | नरसिंहपुर जिले, विशेषकर गाडरवारा क्षेत्र में स्मैक का बढ़ता कारोबार अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। पिछले कुछ महीनों में पुलिस द्वारा लगातार स्मैक तस्करों और पैडलर्स के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे की उपलब्धता में कोई खास कमी नहीं दिख रही। यही वजह है कि आम नागरिकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इस अवैध कारोबार की जड़ तक कब पहुंचा जाएगा।
हाल ही में पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए एक युवक को करीब दो लाख रुपये से अधिक मूल्य की अवैध स्मैक के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस ने इसे बड़ी सफलता बताया, लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए हैं।
क्या पकड़ा गया युवक सिर्फ एक पैडलर है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि गिरफ्तार युवक की आर्थिक स्थिति और रहन-सहन देखकर यह मानना मुश्किल है कि वह स्वयं इतना बड़ा कारोबारी हो सकता है। आम तौर पर नशा तस्करी के बड़े गिरोह बेरोजगार या आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को लालच देकर या नशे की लत लगाकर उन्हें सप्लाई चेन का हिस्सा बना लेते हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पकड़ा गया आरोपी संभवतः केवल नेटवर्क की अंतिम कड़ी हो सकता है, जबकि इसके पीछे बड़े तस्कर सक्रिय हों।
हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और इसकी जांच पुलिस द्वारा की जानी है।
युवाओं का भविष्य खतरे में
स्मैक की बढ़ती उपलब्धता का सबसे अधिक असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों का कहना है कि कई युवा नशे की गिरफ्त में आकर पढ़ाई छोड़ रहे हैं, रोजगार से दूर हो रहे हैं और धीरे-धीरे अपराध की ओर बढ़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नशे की लत के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं। कुछ मामलों में घरों से चोरी, आपसी विवाद और अन्य आपराधिक घटनाओं में भी बढ़ोतरी की चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इन सभी घटनाओं का सीधा संबंध स्मैक से होने की पुष्टि प्रत्येक मामले में नहीं हुई है।
कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं रुक रही सप्लाई?
लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुलिस लगातार स्मैक बरामद कर रही है, तो अगले ही दिन फिर नई खेप बाजार में कैसे पहुंच जाती है? इससे यह संकेत मिलता है कि सप्लाई चेन अभी भी पूरी तरह सक्रिय है और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई से इस कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाना कठिन होगा।
मुख्य सरगनाओं तक पहुंचना जरूरी
क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि नशे के इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए केवल पैडलर्स की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। जांच एजेंसियों को सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर उन लोगों तक पहुंचना होगा जो पर्दे के पीछे रहकर इस कारोबार का संचालन कर रहे हैं।
समाज की भी है जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से समाप्त नहीं होगी। परिवारों, स्कूलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को भी युवाओं को जागरूक करने और उन्हें खेल, शिक्षा तथा रोजगार से जोड़ने के प्रयास तेज करने होंगे। यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें, तभी इस बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
जनता की मांग
क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्मैक तस्करी के पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और गहन जांच कर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जाए। साथ ही नशा मुक्ति अभियान को और प्रभावी बनाया जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।







