गाडरवारा जैन समाज ने विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर सौंपा ज्ञापन, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति की उठाई मांग
विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा और आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जैन समाज ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग उठी।

जैन समाज ने उठाई संतों की सुरक्षा की मांग
गाडरवारा। विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर जैन समाज ने प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर विशेष सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की है। समाज ने हाल ही में आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद दुर्घटना को गंभीर बताते हुए इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी उठाई है।
ज्ञापन में कहा गया कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निहत्थे और पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो समाज को शांति, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे में लगातार हो रही दुर्घटनाएं और हमले पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं।

आर्यिका माताजी दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग
जैन समाज ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि आर्यिका माताजी की मृत्यु केवल सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों और वीडियो क्लिप्स के आधार पर समाज में कई आशंकाएं और सवाल उत्पन्न हुए हैं।
समाज ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
संत विहार मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि जिन मार्गों से जैन साधु-संत विहार करते हैं, वहां विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही पुलिस गश्त, यातायात नियंत्रण और भारी वाहनों की गति सीमा तय करने जैसे कदम तत्काल उठाए जाएं।
समाज ने यह भी मांग की कि संत विहार मार्गों पर चेतावनी बोर्ड, संकेतक और अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग
जैन समाज ने केंद्र और राज्य सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर “संत सुरक्षा नीति” लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि सभी धर्मों के विहाररत संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाना समय की आवश्यकता है।
समाज ने प्रशासन से इस संवेदनशील विषय पर गंभीरता से कार्रवाई करने की अपील की है।







