गाडरवारा में पितृपक्ष का शुभारंभ, छिड़ाव घाट पर पितरों को किया तर्पण
मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने अपने पितरों एवं पूर्वजों को अर्पित किया जल, पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व

गाडरवारा। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। अपने दिवंगत पितरों और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पितृपक्ष के दौरान तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान किए जाते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत गाडरवारा में आज से पितृपक्ष के अवसर पर पितरों को तर्पण देने का क्रम प्रारंभ हुआ।
गाडरवारा के छिड़ाव घाट पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक अपने पितरों को जल अर्पित किया। इस अवसर पर पंडित महेंद्र भार्गव के मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ तर्पण की शुरुआत कराई गई। श्रद्धालुओं ने पवित्र जल में खड़े होकर अपने पितरों का स्मरण किया तथा उनकी आत्मिक शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना की।
पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष वह विशेष अवधि है, जब परिवार के लोग अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों पितरों के प्रति श्रद्धा से किए गए धार्मिक कर्मों का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि पितृपक्ष शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग नदी, घाट और तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर तर्पण करते हैं।
छिड़ाव घाट पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की आवाजाही देखने को मिली। लोगों ने स्नान एवं अन्य धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद कुश, तिल और जल के माध्यम से पितरों को तर्पण अर्पित किया। मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों एवं पूर्वजों को याद करते हुए उनकी शांति के लिए प्रार्थना की।

पूरे पितृपक्ष में होंगे धार्मिक अनुष्ठान
पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोज एवं दान-पुण्य करते हैं। जिन तिथियों में परिवार के किसी सदस्य का निधन हुआ हो, उस तिथि पर विशेष श्राद्ध करने की परंपरा भी है। वहीं जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है।
छिड़ाव घाट पर पितृपक्ष के प्रारंभ के साथ ही तर्पण का यह धार्मिक क्रम शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं के घाट पर पहुंचकर अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने की संभावना है।
परंपरा से जुड़ी है भावनात्मक आस्था
पितृपक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर ही नहीं, बल्कि परिवार की पिछली पीढ़ियों को याद करने और उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का भी समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हैं।
गाडरवारा के छिड़ाव घाट पर आज पितृपक्ष के प्रथम दिन इसी आस्था और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं द्वारा पितरों को अर्पित किया गया जल वातावरण में धार्मिक भाव और श्रद्धा को दर्शाता रहा।







