तवा नदी का सीना छलनी? रात के अंधेरे में गरजती मशीनों ने बढ़ाए सवाल
मरोड़ा से पानबर्री तक कथित अवैध उत्खनन की चर्चा, जनता ने खनिज विभाग से मांगा जवाब

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर। सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र में बहने वाली तवा नदी इन दिनों कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर चर्चा के केंद्र में है। मरोड़ा, पानबर्री और आँचलखेड़ा क्षेत्र में देर रात तक चल रही मशीनों और भारी वाहनों की आवाजों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी किनारे रात के समय ऐसा दृश्य दिखाई देता है मानो कोई बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट संचालित हो रहा हो।
“रात में गरजती मशीनें, दिन में खामोशी”
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन किया जा रहा है। लोगों के मुताबिक नदी के किनारों पर लगातार मशीनें चल रही हैं और भारी वाहन रेत परिवहन में लगे दिखाई देते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि तवा नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
जनता के सीधे सवाल
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से कई गंभीर सवाल पूछे हैं—
- इन क्षेत्रों में कुल कितने हेक्टेयर की खदानें स्वीकृत हैं?
- वर्तमान में कितनी खदानें संचालित हो रही हैं?
- किन नियमों और शर्तों के तहत उत्खनन की अनुमति दी गई है?
- रात के समय मशीनों के संचालन की अनुमति किस आधार पर है?
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन रात में मौके पर निरीक्षण करे तो वास्तविक स्थिति खुद सामने आ सकती है।
पर्यावरण पर भी खतरे की आशंका
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह नदी से लगातार रेत निकाली जाती रही तो भविष्य में जलस्तर और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि अत्यधिक उत्खनन से नदी किनारों का कटाव और जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
जिले के शांत प्रशासनिक माहौल के बीच उठ रहे ये सवाल अब सीधे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर चर्चा का विषय बन गए हैं। लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराएं और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो तत्काल कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तवा नदी के संरक्षण और अवैध उत्खनन पर रोक के लिए ठोस कदम उठाएगा।







