राजनीति

भारत में वामपंथ ही एकमात्र विकल्प : माकपा जिला सचिव जगदीश पटेल

माकपा के जिला सचिव जगदीश पटेल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाजपा और कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने वामपंथ को देश के लिए एकमात्र विकल्प बताते हुए जनता से समर्थन की अपील की।

संवाददाता अवधेश चौकसे

नरसिंहपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जिला सचिव कामरेड जगदीश पटेल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देश की वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने आम जनता से वामपंथी विचारधारा को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि शोषणमुक्त समाज की स्थापना के लिए वामपंथ ही एकमात्र विकल्प है।

जारी विज्ञप्ति में जगदीश पटेल ने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार किसान, मजदूर, छात्र और नौजवानों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं को किसान हितैषी बताती है, लेकिन किसानों को समय पर खाद, बिजली, पानी और उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि देशभर में किसान, मजदूर, छात्र और युवाओं के विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनके अनुसार, वर्तमान आर्थिक नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों के हित में हैं, जिससे आम लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

माकपा जिला सचिव ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस की आर्थिक नीतियों में कोई मूलभूत अंतर नहीं है। उनका आरोप है कि दोनों दलों की नीतियां पूंजीवादी व्यवस्था पर आधारित हैं और आम जनता के हितों की अपेक्षा बड़े आर्थिक वर्गों को लाभ पहुंचाती हैं।

जगदीश पटेल ने कहा कि वामपंथी विचारधारा सामाजिक और आर्थिक समानता की पक्षधर है तथा इसका उद्देश्य मेहनतकश वर्ग के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने दावा किया कि वामपंथी नेताओं का सार्वजनिक जीवन सादगी और पारदर्शिता का उदाहरण रहा है।

अपने बयान में उन्होंने शहीद भगत सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में समानता और शोषणमुक्त व्यवस्था स्थापित करने की आवश्यकता है।

अंत में उन्होंने आम नागरिकों से वामपंथी विचारधारा का समर्थन करने और सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए आगे आने की अपील की।

नोट: यह समाचार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जिला सचिव जगदीश पटेल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ता के हैं।

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