मूंग खरीदी पर केंद्र-राज्य में कौन बोल रहा सच? किसान सभा ने मुख्यमंत्री से मांगा स्पष्टीकरण
मूंग खरीदी को लेकर किसान सभा ने मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा। केंद्र और राज्य सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए पोर्टल खोलने और पूरी फसल खरीद की मांग की।

संवाददाता अवधेश चौकसे
भोपाल। मूंग उत्पादक किसानों के आंदोलन के बाद खरीदी को लेकर केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार के अलग-अलग दावों से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इसे लेकर मध्य प्रदेश किसान सभा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की है।
किसान सभा का कहना है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदी पूरे प्रदेश में होगी या केवल कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित रहेगी। संगठन ने कहा कि इस भ्रम को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि खरीदी का पोर्टल तत्काल खोला जाए, ताकि किसान स्वयं देख सकें कि सरकार की घोषणा वास्तविक है या केवल आश्वासन।
केंद्र और राज्य के दावों पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश किसान सभा के अध्यक्ष अशोक तिवारी, महासचिव अखिलेश यादव, कार्यकारी अध्यक्ष रामजीत सिंह तथा सहायक महासचिव जगदीश पटेल ने कहा कि मूंग खरीदी के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जिससे किसानों के साथ मजाक हो रहा है।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश के कृषि मंत्री दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के कारण खरीदी प्रभावित हो रही है, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देशभर की कुल मूंग खरीदी का 87 प्रतिशत कोटा मध्य प्रदेश को दिया गया है।
सिर्फ 2 प्रतिशत खरीदी का दावा
किसान सभा के अनुसार केंद्रीय मंत्री के बयान में कहा गया है कि वर्ष 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीदने की अनुमति पहले ही मिल चुकी है, लेकिन 16 जुलाई 2026 तक केवल 7,947.92 मीट्रिक टन यानी लगभग 2 प्रतिशत खरीदी ही हो सकी है।
मुख्यमंत्री करें स्थिति स्पष्ट
किसान सभा ने कहा कि यदि केंद्रीय मंत्री का बयान गलत है तो मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से उसका खंडन करें। यदि वह सही है तो प्रदेश सरकार किसानों से माफी मांगे और खरीदी में हुई देरी व लापरवाही की जिम्मेदारी तय करे।
पूरी मूंग खरीदने की मांग
संगठन ने आंदोलनरत किसानों को बधाई देते हुए कहा कि सभी किसानों की उत्पादित मूंग बिना किसी कोटे या सीमा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जानी चाहिए। साथ ही सभी जिला इकाइयों से इस मांग को लेकर सक्रिय रहने का आह्वान किया गया।







