क्राइममध्य प्रदेश

₹1.29 लाख की साइबर ठगी के तार राजस्थान तक, माखननगर पुलिस ने जयपुर-जैसलमेर से दो आरोपियों को पकड़ा

WhatsApp पर सोने के गहनों का लालच, कस्टम के नाम पर जमा कराए ₹1.29 लाख; पुलिस ने पूरी रकम बरामद की

राकेश एक्का | खोजी पत्रकार

माखननगर। WhatsApp पर आया एक मैसेज, सोने के गहने भेजने का भरोसा और फिर कस्टम प्रक्रिया के नाम पर पैसे जमा कराने का सिलसिला। इसी साइबर जाल में फंसकर माखननगर की एक महिला के खाते से ₹1.29 लाख निकल गए। लेकिन मामला दर्ज होने के बाद माखननगर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया तो साइबर ठगी के तार राजस्थान के जयपुर और जैसलमेर तक जा पहुंचे।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध आरोपियों को राजस्थान से पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान ठगी की रकम से संबंधित जानकारी सामने आई और ₹1.29 लाख की पूरी राशि बरामद कर ली गई है।

WhatsApp से शुरू हुआ ठगी का खेल

पुलिस के अनुसार, 21 फरवरी 2026 को जशवती यादव ने माखननगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने WhatsApp के माध्यम से उनसे संपर्क किया और सोने के गहने भेजने की बात कही।

इसके बाद कथित तौर पर गहनों की कस्टम प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर अलग-अलग तरीके से रकम जमा कराई गई। भरोसे में आई पीड़िता ने कुल ₹1,29,000 जमा कर दिए। रकम जमा होने के बाद जब ठगी का एहसास हुआ तो पुलिस में शिकायत की गई।

₹1.29 लाख का रास्ता खोजते हुए राजस्थान पहुंची पुलिस

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस ने उन खातों और लेन-देन से जुड़े सुरागों को खंगाला, जिनके जरिए ठगी की रकम आगे पहुंची थी।

जांच की कड़ियां राजस्थान तक पहुंचने पर पुलिस टीम जयपुर और जैसलमेर पहुंची। वहां से पुलिस ने दो आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की।

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों की पहचान—

  • अनूप पिता तेजराम मीना (24 वर्ष), निवासी चाकसू, राजस्थान
  • हीरसिंह पिता बगतसिंह राजपुरोहित (26 वर्ष), निवासी जैसलमेर, राजस्थान

के रूप में हुई है।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ में ठगी की रकम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई और आरोपियों के कब्जे/उनसे संबंधित स्रोतों से पूरी ₹1.29 लाख की रकम बरामद कर ली गई।

क्या इसके पीछे बड़ा साइबर नेटवर्क है?

माखननगर में सामने आया यह मामला कई सवाल भी खड़े करता है। WhatsApp पर पीड़िता से संपर्क करने वाले लोग कौन थे? उन्हें पीड़िता की जानकारी कहां से मिली? सोने के गहने भेजने का भरोसा देकर कस्टम के नाम पर रकम जमा कराने का तरीका क्या पहले से तैयार किया गया था?

इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या दोनों आरोपी केवल ठगी की रकम प्राप्त करने वाले थे या इनके पीछे कोई बड़ा साइबर नेटवर्क सक्रिय है?

क्या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया है? ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरती थी और इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं—इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से सामने आ सकते हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई

यह कार्रवाई एसपी साईकृष्णा एस. थोटा (IPS), एएसपी अभिषेक राजन एवं एसडीओपी सोहागपुर अरविन्द शाह के निर्देशन में तथा माखननगर थाना प्रभारी निरीक्षक कंचन सिंह ठाकुर के नेतृत्व में की गई।

पुलिस टीम में उपनिरीक्षक आकाशदीप पचाया, प्रधान आरक्षक दिलीप चौरे, आरक्षक मनीष कपाले, आरक्षक शुभम राय तथा साइबर सेल के आर. प्रशांत राजपूत, संदीप यदुवंशी एवं सागर कुशवाहा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पूरी रकम बरामद, लेकिन जांच अभी बाकी

पुलिस की कार्रवाई से पीड़िता से ठगी गई ₹1.29 लाख की पूरी रकम बरामद होने की बात सामने आई है। हालांकि, मामले की असली तस्वीर आगे की जांच में और साफ हो सकती है।

सवाल अब सिर्फ ₹1.29 लाख की बरामदगी का नहीं है। सवाल यह है कि WhatsApp पर जाल बिछाने वाले असली चेहरे कौन हैं और इस नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं?

माखननगर पुलिस राजस्थान तक पहुंच चुकी है—अब जांच की अगली कड़ी उन चेहरों तक पहुंचना अहम होगी, जो इस पूरे साइबर जाल के पीछे हो सकते हैं।

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