शराब दुकानों में पारदर्शिता पर सवाल: रेट लिस्ट गायब, स्कैनर छिपे, बिल भी नहीं
एमआरपी की जानकारी से ग्राहकों को दूर रखने की कोशिश? ओवररेटिंग के आरोपों के बीच आबकारी विभाग की निगरानी पर फिर उठे सवाल

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर
शाहपुर। मोतीढ़ाना, पतौवापुरा और भौंरा की शराब दुकानों पर कथित ओवररेटिंग के आरोपों के बीच अब एक और गंभीर मामला सामने आया है। ग्राहकों का आरोप है कि दुकानों पर निर्धारित मूल्य की रेट लिस्ट तक प्रदर्शित नहीं की गई है। इतना ही नहीं, मूल्य की जानकारी देने के लिए लगाए गए क्यूआर स्कैनर भी ऐसे स्थानों पर लगाए गए हैं जहां आम ग्राहक की नजर आसानी से नहीं पहुंचती। ग्राहकों का कहना है कि जब वे स्कैनर के माध्यम से शराब की वास्तविक कीमत देखने की बात करते हैं तो कर्मचारियों द्वारा जवाब दिया जाता है कि इस रेट में शराब नहीं मिलेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि शराब निर्धारित मूल्य पर ही बेची जा रही है तो फिर ग्राहकों को रेट जानने से क्यों रोका जा रहा है?
रेट लिस्ट नहीं, बिल नहीं, फिर ग्राहक कैसे जाने सही कीमत?
आबकारी नियमों के तहत ग्राहकों को शराब का निर्धारित मूल्य जानने का अधिकार है, लेकिन कई दुकानों पर न तो स्पष्ट रेट लिस्ट दिखाई देती है और न ही खरीदारों को बिल दिए जाने की व्यवस्था प्रभावी नजर आती है। ग्राहकों का आरोप है कि बिना बिल के बिक्री होने से यह पता ही नहीं चल पाता कि उनसे वसूली गई राशि सही है या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार चल रहा है तो प्रत्येक बिक्री पर बिल देना और रेट लिस्ट प्रदर्शित करना सबसे पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके विपरीत दुकानों पर पारदर्शिता का अभाव संदेह को और गहरा कर रहा है।
शिकायतों के बाद भी आबकारी विभाग की चुप्पी
क्षेत्र में लगातार ओवररेटिंग, बिल नहीं देने और रेट लिस्ट गायब होने जैसी शिकायतें सामने आने के बावजूद आबकारी विभाग की ओर से कोई विशेष जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि विभाग शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है या नहीं।
जानकारों का कहना है कि यदि विभाग चाहे तो सीसीटीवी फुटेज, बिक्री रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और बिलिंग सिस्टम की जांच कर कुछ ही घंटों में स्थिति स्पष्ट कर सकता है। लेकिन अब तक ऐसी कोई कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
बड़ा सवाल
जब शराब दुकानों पर रेट लिस्ट तक दिखाई नहीं दे रही, स्कैनर छिपाकर लगाए जा रहे हैं और ग्राहकों को बिल नहीं मिल रहे, तब आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? क्या विभाग को इन खामियों की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों के बावजूद आंखें मूंद ली गई हैं?







