गाडरवारा के आसपास नशे का बढ़ता जाल: गांव-गांव तक पहुंचा पाउडर और बीयर का कारोबार, युवाओं का भविष्य खतरे में
नरसिंहपुर के गाडरवारा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है। बीयर, गांजा और नशीले पदार्थों की बिक्री के आरोपों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका/गाडरवारा (नरसिंहपुर)।
एक समय था जब नशे का पाउडर, चरस और अन्य मादक पदार्थों का सेवन बड़े शहरों और महानगरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह समस्या ग्रामीण क्षेत्रों तक गहराई से पहुंच चुकी है। गाडरवारा नगर और उससे लगे गांवों में नशे का बढ़ता कारोबार लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ी गंभीर संकट में पड़ सकती है।
क्षेत्र में शराब, गांजा, चरस, अफीम और अन्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांवों और कस्बों में नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिससे युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
हर कुछ किलोमीटर पर शराब दुकानें, गांवों में भी अवैध बिक्री के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि गाडरवारा नगर के आसपास लगभग हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर शराब दुकानें संचालित हो रही हैं। वहीं इन दुकानों के बीच स्थित कई गांवों में भी अवैध शराब बिक्री होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
लोगों का कहना है कि कुछ किराना दुकानों, चाय-नाश्ते के ठेलों और टपरा नुमा दुकानों से भी नशीले पदार्थों की बिक्री किए जाने की चर्चाएं आम हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों में इसे लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
ठंडी बीयर बेचने के लिए लगाए जा रहे बड़े फ्रीजर
क्षेत्र में नशे के कारोबार का दायरा कितना बढ़ चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ स्थानों पर अवैध रूप से बड़े फ्रीजर लगाकर ठंडी बीयर बेचने की भी बातें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का कारोबार खुलेआम होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।
ग्राम बनवारी सहित कई क्षेत्रों में बढ़ी चिंता
ग्राम बनवारी सहित आसपास के कई गांवों में नशे के नए रूपों के फैलने की चर्चा के बाद स्थानीय नागरिकों में भय और आक्रोश दोनों दिखाई दे रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि नशे की आसान उपलब्धता के कारण किशोर और युवा इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रशासनिक ढिलाई और संरक्षण के आरोप
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक ढिलाई और कथित राजनीतिक संरक्षण के कारण अवैध कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे अवैध कारोबारियों का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सामाजिक संगठनों ने भी उठाई आवाज
नशे के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए कुछ स्थानीय युवा संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसके खिलाफ अभियान चलाने की बात कही है। उनका कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज को भी जागरूक होकर इस समस्या के खिलाफ एकजुट होना होगा।
निष्कर्ष
गाडरवारा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है। यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह स्थिति युवाओं और समाज के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। ऐसे में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को मिलकर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीण अंचलों को नशे के जाल से बचाया जा सके।







