सालीचौका में फिर पनप रही “अवैध अहाताबार” संस्कृति?शराब दुकानों के आसपास खुलेआम बैठाकर कराया जा रहा सेवन, पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका, नरसिंहपुर।
सालीचौका क्षेत्र में इन दिनों शराब दुकानों के आसपास खुलेआम लोगों को बैठाकर शराब पिलाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चाय-नाश्ता, चकना, किराना और पानी पाउच की दुकानों की आड़ में अस्थायी रूप से “अवैध अहाताबार” जैसी व्यवस्था संचालित की जा रही है, जहां शराब पीने वालों को बैठने की जगह से लेकर पानी, डिस्पोजल और चकना तक की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में शराब दुकानों के आसपास शाम होते ही माहौल पूरी तरह बदल जाता है। कई जगहों पर लोग खुलेआम बैठकर शराब सेवन करते दिखाई देते हैं, जिससे आसपास रहने वाले परिवारों, महिलाओं और राहगीरों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
कई क्षेत्रों में खुला संचालन होने के आरोप
लोगों के अनुसार सालीचौका ठेका क्षेत्र, बसूरिया, मारेगांव रोड, अमाड़ा रोड, पोडार चौराहा और स्टेट हाईवे-22 के आसपास ऐसी गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। इतना ही नहीं, पनागर शराब दुकान के आसपास भी खुलेआम शराब सेवन कराए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले तक पुलिस की नियमित कार्रवाई और सख्ती के चलते ऐसी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगी हुई थी। गुरुवार और रविवार को दिन-रात पुलिस की गश्त होती थी, जिससे शराब दुकानों के आसपास अवैध बैठकी करने वालों में डर बना रहता था।
लेकिन अब लोगों का आरोप है कि अचानक स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है और शराब दुकानों के आसपास खुलेआम “अवैध अहाताबार” संस्कृति दोबारा सक्रिय हो गई है।
“कुछ छुटभैया गुर्गों के संरक्षण” के आरोप
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों और छुटभैया तत्वों के संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों का कहना है कि बिना संरक्षण के इतने खुलेआम इस प्रकार की गतिविधियां चल पाना संभव नहीं है।
यही कारण है कि अब स्थानीय नागरिक पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
कानून व्यवस्था और सामाजिक माहौल पर असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार शराब सेवन होने से कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।
लोगों की प्रमुख चिंताएं:
- महिलाओं और परिवारों को असुरक्षा महसूस होना
- युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ना
- सड़क किनारे विवाद और मारपीट की घटनाओं की आशंका
- सार्वजनिक स्थानों का माहौल खराब होना
- असामाजिक तत्वों की गतिविधियों में बढ़ोतरी
लोगों का कहना है कि यदि शराब दुकानों के आसपास इस प्रकार बैठाकर शराब पिलाने की छूट ही देनी है, तो सरकार को वैधानिक “अहाताबार” व्यवस्था फिर से शुरू कर देनी चाहिए, ताकि कम से कम शासन को राजस्व तो प्राप्त हो।
वर्तमान स्थिति में निजी लोग अवैध तरीके से व्यवस्थाएं संचालित कर रहे हैं और कानून व्यवस्था मजाक बनती दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों की मांग
क्षेत्रवासियों ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि:
- शराब दुकानों के आसपास बैठाकर शराब पिलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो
- चकना दुकानों और अवैध बैठकी स्थलों की जांच की जाए
- पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त अभियान चलाए
- सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन रोकने के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर क्षेत्र में अवैध “अहाताबार संस्कृति” इसी तरह फलती-फूलती रहेगी।







