सड़क नहीं तो आर-पार की लड़ाई! धरने के 23वें दिन किसानों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी, किसान सभा कमेटी का गठन

संवाददाता अवधेश चौकसे
गाडरवारा।
बारहा बड़ा क्षेत्र में सड़क निर्माण सहित विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। धरने के 23 दिन पूरे होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश है। बुधवार 13 मई को धरना स्थल पर प्रदेश और जिला स्तर के किसान सभा नेताओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, छात्र-छात्राएं और ग्रामीण मौजूद रहे।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन किसी भी हालत में खत्म नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अब आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसमें पुतला दहन, क्रमिक अनशन, आमरण अनशन और चक्काजाम जैसे बड़े आंदोलन शामिल होंगे।
“सिर्फ आश्वासन, जमीन पर कोई काम नहीं”
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 23 दिनों में जनपद सीईओ, एसडीओ और इंजीनियरों द्वारा कई बार दौरा किया गया, स्टीमेट बनाकर जिले को भेजने की बात कही गई, लेकिन धरातल पर अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। लगातार मिल रहे आश्वासनों से अब ग्रामीणों का भरोसा टूटने लगा है।
धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं और युवाओं ने कहा कि बारिश का मौसम नजदीक है, लेकिन सड़क की हालत आज भी बदहाल बनी हुई है। गांव के लोगों को आवागमन, शिक्षा, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान सभा कमेटी का गठन, आंदोलन तेज करने का संकल्प
धरने के दौरान मध्यप्रदेश किसान सभा बारहा बड़ा इकाई का सर्वसम्मति से गठन भी किया गया। यह गठन प्रदेश सहायक महासचिव जगदीश पटेल, जिला सह सचिव नरेंद्र वर्मा और यदुराज वर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
नई कमेटी में —
- अध्यक्ष: दिनेश कुशवाहा
- सचिव: अरविंद कुशवाहा
- उपाध्यक्ष: प्यारेलाल कुशवाहा एवं रामाधार कुशवाहा
- सह सचिव: रामसेवक कुशवाहा
इसके अलावा कार्यकारिणी में कनछेदी कुशवाहा, कपिल कुशवाहा, केशव कुशवाहा, कैलाश कुशवाहा, हेमंत कुशवाहा, मोहन कुशवाहा, सत्यम कुशवाहा, शिवम कुशवाहा, शांतिबाई कुशवाहा, सुशीलाबाई कुशवाहा, जमनाबाई कुशवाहा, गीता बाई कुशवाहा, मुन्नीबाई, जानकी बाई कुशवाहा, रघुवर कुशवाहा, राजेश कुशवाहा, हेमराज कुशवाहा, अखलेश कुशवाहा और जगदीश कुशवाहा को शामिल किया गया।
“अब पीछे हटने का सवाल नहीं”
धरना स्थल पर नेताओं और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन अब सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। लोगों ने संकल्प लिया कि जब तक प्रशासन सड़क निर्माण शुरू नहीं करता, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो इसे जिलेभर में फैलाया जाएगा।







