मध्य प्रदेश

नहर विभाग की लापरवाही से तबाह किसान, 2 एकड़ फसल बर्बाद… अब आत्महत्या की कगार पर पहुंचा किसान

सोहागपुर के खाड़ादेवरी गांव में नहर विभाग की लापरवाही से किसान की 2 एकड़ फसल बर्बाद, कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, किसान आत्महत्या की कगार पर।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

सोहागपुर/गाडरवारा। मध्यप्रदेश के सोहागपुर ब्लॉक के ग्राम खाड़ादेवरी (बारंगी पंचायत) से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां नहर विभाग की भारी लापरवाही ने एक मेहनती किसान को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है।

गांव के किसान कीरत सिंह पटेल की लगभग 2 एकड़ खड़ी फसल नहर फूटने की लगातार घटनाओं में पूरी तरह तबाह हो चुकी है। हालत इतनी गंभीर हो गई है कि किसान अब आत्महत्या जैसे कदम उठाने की बात करने को मजबूर हो गया है।

बार-बार टूटी नहर, हर बार बर्बाद हुई फसल

यह कोई एक बार की घटना नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, 2 से 3 बार नहर अचानक फूट गई, जिससे पानी सीधे खेतों में घुस गया और पूरी फसल बर्बाद हो गई।
किसान की मेहनत, लागत और उम्मीदें—सब कुछ पानी में बह गया, लेकिन जिम्मेदार विभाग हर बार मूकदर्शक बना रहा।

शिकायतें हुईं, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला

पीड़ित किसान ने कई बार MP 181 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और स्थानीय अधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले।
जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे किसान का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।

“अब मुझे कुछ लेना-देना नहीं” – अधिकारी का गैरजिम्मेदार बयान

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि संबंधित विभाग के एक अधिकारी, जिनका रिटायरमेंट नजदीक है, खुलेआम यह कहते नजर आए—

“अब मुझे कुछ लेना-देना नहीं, जितना बनता है उतना ही करूंगा।”

इस तरह का बयान न सिर्फ गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

गांव में आक्रोश, प्रशासन पर उठ रहे सवाल

घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नहर की मरम्मत और निगरानी की जाती, तो यह नुकसान टाला जा सकता था।
अब जब किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है, तो विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।

कर्ज, नुकसान और मानसिक तनाव से टूटा किसान

किसान कीरत सिंह पटेल की आर्थिक और मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
फसल बर्बादी, कर्ज का दबाव और प्रशासन की बेरुखी ने उसे अंदर से तोड़ दिया है।
अगर जल्द ही प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो यह मामला किसी बड़ी अनहोनी में बदल सकता है।

सिस्टम की विफलता की एक और कहानी

यह घटना सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई है, जहां शिकायतें फाइलों में दब जाती हैं और खेतों में किसानों के सपने उजड़ते रहते हैं।

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