दलदल में विकास के दावे! महिला का शव खटिया पर ढोने को मजबूर हुए ग्रामीण, 10 साल से सड़क का इंतजार
बारिश में कच्चा रास्ता बना दलदल, एंबुलेंस ने गांव में जाने से किया इनकार; ग्रामीण बोले- जूते घिस गए, लेकिन सड़क नहीं बनी

गाडरवारा। तहसील क्षेत्र की बारहा बड़ा ग्राम पंचायत के काछी टोला से सोमवार को सामने आई एक तस्वीर ने गांव में सड़क और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बीमारी से मृत एक महिला के शव को परिजनों और ग्रामीणों को खटिया पर रखकर कंधे के सहारे करीब 2 किलोमीटर लंबे दलदली रास्ते से घर तक ले जाना पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार काछी टोला को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला करीब 2 किलोमीटर का कच्चा रास्ता बारिश के चलते पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। रास्ते की हालत इतनी खराब है कि एंबुलेंस सहित अन्य वाहन गांव तक पहुंचने में असमर्थ हैं। इसका सबसे ज्यादा असर बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है।
एंबुलेंस मुख्य सड़क तक पहुंची, आगे जाने से किया इनकार
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में 35 वर्षीय सुमन बाई कुशवाहा की बीमारी के चलते मौत हो गई। अस्पताल से शव को एंबुलेंस के जरिए मुख्य सड़क तक लाया गया, लेकिन वहां से गांव तक जाने वाला रास्ता दलदल में तब्दील होने के कारण एंबुलेंस चालक ने वाहन आगे ले जाने से मना कर दिया।
इसके बाद परिजन और ग्रामीण मजबूरी में शव को खटिया पर रखकर कंधों के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से गांव तक ले गए। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है।
10 साल से सड़क की मांग, अब तक सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि काछी टोला को पक्की सड़क से जोड़ने की मांग पिछले करीब 10 वर्षों से की जा रही है। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत, जिला पंचायत, तहसील कार्यालय के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों से भी कई बार सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन उनका आरोप है कि हर बार आश्वासन ही मिला।
ग्रामीण ओमप्रकाश कुशवाहा ने कहा कि वे पिछले 10 साल से सड़क की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते जूते घिस गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि महिला का शव खटिया पर ले जाना ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति है।
वहीं सेवाराम कुशवाहा ने बताया कि बारिश के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना तक मुश्किल हो जाता है। किसी के बीमार होने पर उसे खटिया पर ले जाने की नौबत आती है। उनका कहना है कि दलदल के कारण एंबुलेंस चालक भी वाहन गांव तक ले जाने से बचते हैं।
गोविंद कुशवाहा ने कहा कि सरपंच, सचिव और जनप्रतिनिधियों से लगातार सड़क की मांग की जाती रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सड़क बन जाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक रास्ते पर पर्याप्त मुरम तक नहीं डाली गई।
सड़क नहीं तो विकास के दावों पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि काछी टोला की बदहाल सड़क केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। बारिश के मौसम में गांव के लोगों का मुख्य सड़क तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।
महिला के शव को खटिया पर रखकर दलदल से ले जाने की घटना ने ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग को एक बार फिर सामने ला दिया है। ग्रामीण अब प्रशासन से तत्काल रास्ते को चलने योग्य बनाने और करीब 2 किलोमीटर की पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग कर रहे हैं।
अब सवाल यह है कि वर्षों से सड़क की मांग कर रहे काछी टोला के ग्रामीणों को कब तक दलदल और कीचड़ के बीच आवागमन की मजबूरी झेलनी पड़ेगी और कब गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी?







