मध्य प्रदेश

50 लाख की नल-जल योजना बनी मजाक! दो साल से सूखे पड़े नल, बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे गाडरवारा के काटजू नगर के ग्रामीण

गाडरवारा के ग्राम काटजू नगर में सरकारी योजना पर उठे गंभीर सवाल, भुगतान के बाद भी नहीं मिला पानी

गाडरवारा। सरकार गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने और हर घर नल से जल देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। ग्राम पंचायत पलोहा के अंतर्गत आने वाले ग्राम काटजू नगर में करीब 40 से 50 लाख रुपए की लागत से बनाई गई नल-जल योजना पिछले दो वर्षों से सिर्फ कागजों में ही दौड़ती नजर आ रही है। गांव में पाइप लाइन बिछ गई, नल लग गए, टंकी का काम भी पूरा बताया जा रहा है, लेकिन आज तक एक बूंद पानी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुआ।

ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का निर्माण कार्य लगभग दो साल पहले पूरा हो चुका था। इसके बाद कई बार अधिकारियों और जिम्मेदारों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। हालात यह हैं कि गांव में लगे अधिकांश नल आज भी सूखे पड़े हैं और लोग पीने के पानी के लिए पुराने स्रोतों पर निर्भर हैं।

गर्मी में बढ़ी परेशानी, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

भीषण गर्मी के इस दौर में गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। पानी की समस्या ने ग्रामीणों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। गांव की महिलाएं सुबह होते ही पानी की तलाश में निकल पड़ती हैं। कई परिवारों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी इस संकट से सबसे ज्यादा परेशान हैं।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि सरकार ने घरों के बाहर नल तो लगा दिए, लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं आया। कुछ स्थानों पर पाइप लाइन अधूरी पड़ी है तो कहीं लीकेज की समस्या है। लोगों का आरोप है कि योजना को जल्दबाजी में अधूरा छोड़ दिया गया और बाद में किसी ने पलटकर नहीं देखा।

भुगतान हो गया, लेकिन योजना चालू क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब योजना पूरी बताए जाने के बाद ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया, तो आखिर अब तक जल सप्लाई शुरू क्यों नहीं हुई? लोगों का कहना है कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद गांव के हालात जस के तस बने हुए हैं।

गांव के युवाओं ने आरोप लगाया कि योजना में गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा गया। कई जगह पाइप लाइन खराब हो चुकी है और नल टूटे पड़े हैं। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में पूरी योजना पूरी तरह बेकार हो सकती है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

लगातार उपेक्षा और पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों में अब भारी आक्रोश दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे पंचायत से लेकर जनपद और कलेक्टर कार्यालय तक आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि —

  • नल-जल योजना की तकनीकी जांच कराई जाए
  • ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
  • योजना कब और किन परिस्थितियों में पूर्ण घोषित की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए
  • तत्काल गांव में पेयजल व्यवस्था शुरू कराई जाए

सरकारी दावों पर सवाल

काटजू नगर की यह स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा तक नहीं मिल पा रही, तो आखिर जिम्मेदार कौन है?

गांव के लोगों का कहना है कि “कागजों में गांव तक पानी पहुंच चुका है, लेकिन असलियत में आज भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं।”

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या ग्रामीणों को वास्तव में उनका हक मिल पाता है या फिर यह योजना भी सिर्फ सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाएगी।

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