जबलपुर में भंवरताल रोड का नामकरण ‘ओशो साधना पथ’, योगेश भवन हुआ ‘ओशो निवास’; अनावरण करेंगे पूज्य मुरारी बापू
जबलपुर में भंवरताल रोड का नाम ‘ओशो साधना पथ’ और योगेश भवन का नाम ‘ओशो निवास’ रखा गया। 11 दिसंबर को मुरारी बापू नामपट्ट का अनावरण करेंगे। ओशो स्मृतियों से जुड़े इन स्थलों का आध्यात्मिक महत्व बढ़ा।

जबलपुर, 28 नवंबर।
संस्कारधानी जबलपुर की आध्यात्मिक पहचान को नई ऊँचाई देते हुए शहर के एक प्रमुख मार्ग और ऐतिहासिक भवन को ओशो से जुड़े नामों में परिवर्तित किया गया है। महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नूजी’ द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के बाद शास्त्री ब्रिज से ब्लूम चौक तक का पूरा मार्ग—भंवरताल उद्यान रोड—अब ‘ओशो साधना पथ’ (Osho Bodhi Tree Road) के नाम से जाना जाएगा।
इसके साथ ही ओशो के ऐतिहासिक निवास ‘योगेश भवन’ का नया नाम ‘ओशो निवास (Osho House)’ कर दिया गया है। यह दोनों स्थान ओशो के जीवन, साधना और ज्ञान से गहराई से जुड़े रहे हैं।
ओशो साधना पथ: आत्मज्ञान से जुड़ी पवित्र स्मृतियों वाला मार्ग
भंवरताल गार्डन वह पावन स्थान है जहां वर्ष 1953 की 21 मार्च की मध्यरात्रि को 21 वर्ष की अवस्था में ओशो को मौलश्री वृक्ष के नीचे ध्यान के दौरान आत्मबोध (Enlightenment) की प्राप्ति हुई थी। इस क्षण की स्मृति में दुनिया भर के ओशो संन्यासी ‘संबोधि दिवस’ मनाते हैं।
इसी मार्ग को उनके साधना-स्थल के सम्मान में नया नाम दिया गया है।
योगेश भवन बना ‘ओशो निवास’: ओशो के जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय
जब ओशो आचार्य रजनीश नाम से जाने जाते थे, और महाकौशल कॉलेज में दर्शनशास्त्र का अध्यापन करते थे, तब वे लगभग सात वर्षों तक योगेश भवन में निवासरत रहे। यह अवधि ओशो के विचारों, प्रवचनों और आध्यात्मिक परिवर्तन का महत्त्वपूर्ण समय माना जाता है।
मुरारी बापू करेंगे नामपट्ट का अनावरण – एक ऐतिहासिक क्षण
ओशो के 11 दिसंबर जन्मोत्सव के अवसर पर ‘ओशो साधना पथ’ और ‘ओशो निवास’ के नामपट्ट (Name Plaque) का औपचारिक अनावरण पूज्य मुरारी बापू करेंगे।
यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि—
6 से 14 दिसंबर तक मुरारी बापू द्वारा ‘ओशो विषयक रामकथा’ आयोजित होगी।
यह पहली बार होगा जब ओशो के दृष्टिकोण पर आधारित रामकथा कही जाएगी, जिसे सुनने देश-विदेश से हजारों ओशो प्रेमी जबलपुर पहुँच रहे हैं।
ओशो की राम-आधारित पुस्तकें — आध्यात्मिक साहित्य की अनमोल निधि
ओशो की सात पुस्तकें राम के नाम पर केंद्रित हैं, जो उनके अध्यात्म, प्रेम और भक्ति के अनूठे विचारों को दर्शाती हैं:
- नहिं राम बिन ठांव
- रामदुवारे जो मरै
- रामनाम जान्यो नहीं
- पीवत रामरस लगी खुमारी
- मैंने राम रतन धन पायो
- राम नाम रस पीजै
- राम नाम निज औषधि
ये ग्रंथ ओशो के विचारों में रामभक्ति की आत्मीयता और गहनता को उजागर करते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में होगी विस्तृत जानकारी
इस ऐतिहासिक नामकरण को लेकर नगर निगम जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसमें—
- महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नूजी’
- नगर निगम अधिकारी
- ओशो प्रेमी संगठन
विस्तृत जानकारी साझा करेंगे।
यह कदम जबलपुर की आध्यात्मिक विरासत को विश्व मंच पर एक नई पहचान देगा और शहर के पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
गाडरवारा में मुरारी बापू का 5 दिसंबर को आगमन
इसके अतिरिक्त, सुप्रसिद्ध कथावाचक मुरारी बापूजी 5 दिसंबर को गाडरवारा पहुँचेंगे, जहाँ वे ओशो से जुड़े महत्त्वपूर्ण स्थलों का दर्शन करेंगे।
यह कार्यक्रम गाडरवारा और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि माना जा रहा है।







