गाडरवारा: पुराने विवाद में हत्या के प्रयास के आरोपी को 5 साल का कठोर कारावास, तीन अन्य पर भी लगा जुर्माना
तेंदूखेड़ा की घटना में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार तिवारी का फैसला

गाडरवारा। तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र में पुराने विवाद को लेकर हुई मारपीट और हत्या के प्रयास के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार तिवारी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को 5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने अन्य तीन आरोपियों को भी दोषी मानते हुए अर्थदंड से दंडित किया है।
यह था पूरा मामला
अपर लोक अभियोजक महेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि घटना 8 जून 2025 की सुबह तेंदूखेड़ा की है। फरियादी भूरे उर्फ जितेन्द्र अग्रवाल अपने परिचित देवेन्द्र सेन को सूरजकुंड नर्मदा नदी जाने के लिए बुलाने उसके घर पहुंचे थे।
इसी दौरान नूर मोहम्मद उर्फ बुद्धु कुरैशी (बुद्धु भाईजान) अपने तीन बेटों जावेद उर्फ गोलू कुरैशी, आसिफ कुरैशी और आकिब कुरैशी के साथ वाहन से वहां पहुंचे। आरोप है कि चारों लाठी-डंडों से लैस होकर देवेन्द्र सेन के घर में घुस गए और पुराने विवाद को लेकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
घटना के बाद पीड़ित पक्ष की शिकायत पर थाना तेंदूखेड़ा पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
जांच में बढ़ाई गई गंभीर धारा
विवेचना के दौरान चिकित्सकीय रिपोर्ट और चोटों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) (हत्या के प्रयास से संबंधित प्रावधान) की वृद्धि की। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
मुख्य आरोपी को 5 साल की सजा
प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अपर लोक अभियोजक के तर्कों से सहमत होते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार तिवारी ने आरोपी आकिब कुरैशी को धारा 109(1) बीएनएस के तहत दोषी करार दिया।
न्यायालय ने उसे 5 वर्ष के कठोर कारावास तथा 3,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
तीन अन्य आरोपियों पर भी जुर्माना
मामले के अन्य आरोपी नूर मोहम्मद उर्फ बुद्धु कुरैशी, जावेद उर्फ गोलू कुरैशी और आसिफ कुरैशी को न्यायालय ने धारा 115(2)/3(5) बीएनएस के तहत दोषी मानते हुए 2-2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
शासन की ओर से हुई प्रभावी पैरवी
मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक महेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर यह फैसला सुनाया।







