नेपाल की संसद में घुसे प्रदर्शनकारी, पुलिस फायरिंग में 16 की मौत और 80 से ज्यादा घायल
सोशल मीडिया बैन से भड़के Gen-Z युवा, काठमांडू समेत कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन

नेपाल की संसद। नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाए जाने के बाद विरोध की आग सड़कों से होते हुए संसद तक पहुंच गई। सोमवार को राजधानी काठमांडू घाटी समेत कई शहरों में युवा प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर संसद परिसर में प्रवेश कर लिया। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। इस दौरान हुई गोलीबारी में कम से कम 16 लोगों की मौत और 80 से ज्यादा घायल हो गए।
3 पत्रकार भी घायल
इस घटना में प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पत्रकार भी चोटिल हुए। तीन पत्रकारों को गोली लगी है, जिनमें श्याम श्रेष्ठ की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी को काठमांडू के सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई से दर्जनों लोग रबर की गोलियों से भी घायल हुए हैं।

हालात बिगड़ने पर सेना तैनात
स्थिति बिगड़ने पर नेपाल सरकार ने संसद परिसर और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। सेना ने मोर्चा संभाल लिया है और संसद भवन के गेट के बाहर सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।
क्यों भड़के युवा?
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X (पूर्व ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का कहना है कि जब तक ये कंपनियां नेपाल में अपना दफ्तर खोलकर रजिस्ट्रेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार नहीं करतीं, तब तक बैन हटाया नहीं जाएगा।
ओली का अल्टीमेटम
पीएम ओली ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा—
“युवाओं को समझना चाहिए कि प्रदर्शन की कीमत चुकानी पड़ती है।”
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स धांधली और अव्यवस्था रोकने के लिए देश में कानूनी ढांचे के तहत काम करें।
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कौन हैं Gen-Z प्रदर्शनकारी?
इस आंदोलन की अगुवाई Gen-Z (जनरेशन Z) के युवा कर रहे हैं। यह पीढ़ी 1997 से 2012 के बीच जन्मी है, जिसे “डिजिटल नेटिव्स” कहा जाता है। ये सोशल मीडिया और इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसलिए सोशल मीडिया बैन को लेकर इनकी नाराजगी सबसे ज्यादा देखी जा रही है।







