BIG NEWS: गाडरवारा कांच मंदिर मार्ग पर मौत का तांडव, 3 लोगों की गई जान
गाडरवारा के कांच मंदिर मार्ग पर एक ही दिन में दो दर्दनाक हादसों में 3 लोगों की मौत। भारी वाहनों, खड़े खराब ट्रकों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल।

गाडरवारा। गाडरवारा क्षेत्र में कांच मंदिर मार्ग अब सड़क नहीं, मौत का रास्ता बनता जा रहा है। रविवार को एक ही दिन में दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में गुस्सा है कि बार-बार हादसे हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
शाम को एक मौत, रात में दो और… आखिर जिम्मेदार कौन?
सूत्रों के अनुसार रविवार शाम करीब 6:30 बजे सड़क किनारे खड़े खराब ट्रक से टकराने के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। सवाल यह है कि घंटों सड़क पर खड़ा खराब ट्रक आखिर हटाया क्यों नहीं गया?
इसके कुछ घंटों बाद रात करीब 10:30 बजे उसी मार्ग पर एक डंपर ने बाइक सवार दो लोगों को कुचल दिया, जिससे दोनों की मौके पर मौत हो गई।
एक ही दिन में तीन मौतें… क्या प्रशासन को अब भी चेतावनी की जरूरत है?

भारी वाहन या खुला मौत का खेल?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की बेलगाम आवाजाही लंबे समय से हादसों की वजह बनी हुई है। डंपर और ट्रकों की आवाजाही पर न नियंत्रण है, न निगरानी।
- ओवरलोड भारी वाहन
- सड़क किनारे खड़े खराब ट्रक
- ट्रैफिक नियंत्रण नदारद
- जिम्मेदार विभाग मौन
लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी बड़े जनआक्रोश या और बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
तीन दिन पहले भी हादसा, फिर भी नहीं जागा सिस्टम
स्थानीय नागरिकों के अनुसार तीन दिन पहले भी इसी मार्ग पर खड़े ट्रक से टकराकर एक युवक गंभीर घायल हुआ था, लेकिन इसके बाद भी न ट्रैफिक व्यवस्था सुधरी, न खराब वाहनों को हटाया गया।
लगातार हादसे बता रहे हैं—यह दुर्घटना नहीं, लापरवाही से हो रही मौतें हैं।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
घटनाओं के बाद क्षेत्रवासियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मांग की है—
- भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगे
- कांच मंदिर मार्ग पर ट्रैफिक निगरानी बढ़े
- सड़क किनारे खड़े खराब वाहन तुरंत हटें
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित किया जाए
लोगों का सवाल — मौतों का जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था सुधारी जाती तो शायद तीन जिंदगियां बच सकती थीं।
जब सड़कें सुरक्षित न हों, नियम लागू न हों और प्रशासन मौन रहे, तो हादसे नहीं, मौतें व्यवस्थागत अपराध लगती हैं।
क्षेत्र में सवाल एक ही है—आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन?







