एक माह बाद भी पूरी नहीं हुई ग्राम पंचायत तारा की जांच, देरी पर उठे सवाल; ग्रामीण बोले- कहीं कमियां सुधारने का मौका तो नहीं मिल गया?
कलेक्टर के निर्देश पर गठित हुई थी तीन सदस्यीय जांच टीम, सचिव अब भी उसी पंचायत के प्रभार में; निष्पक्ष जांच की मांग तेज

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर
शाहपुर। ग्राम पंचायत तारा में निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर अब नए सवाल खड़े होने लगे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल को करीब एक माह पहले जांच के लिए भेजा गया था। जांच दल ने पंचायत पहुंचकर प्रारंभिक निरीक्षण तो किया, लेकिन इसके बाद आज तक जांच पूरी नहीं हो सकी। एक माह बीत जाने के बावजूद रिपोर्ट लंबित रहने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा निष्पक्षता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब जांच दल का गठन हुआ था, तब उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन एक बार मौके का निरीक्षण करने के बाद जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई और टीम दोबारा गांव नहीं पहुंची। इसी बीच पंचायत में लंबे समय से अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराने और कई स्थानों पर सुधार कार्य शुरू होने की बात सामने आई है।
क्या जांच में देरी से कमियां सुधारने का मिला मौका?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायत के तत्काल बाद जांच पूरी कर ली जाती, तो निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आती। उनका आरोप है कि जांच लंबी खिंचने से संबंधित पक्षों को अधूरे कार्य पूरे कराने और कथित कमियों को दूर करने का पर्याप्त समय मिल गया। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि जांच रिपोर्ट शिकायत के समय की वास्तविक स्थिति को दर्शाएगी या वर्तमान स्थिति को।
ग्रामीणों का मानना है कि किसी भी जांच का उद्देश्य शिकायत के समय मौजूद हालात का निष्पक्ष मूल्यांकन करना होता है। यदि जांच के दौरान ही निर्माण कार्य पूरे हो जाएं या रिकॉर्ड में बदलाव हो जाए, तो वास्तविक तथ्यों तक पहुंचना कठिन हो सकता है।
सचिव अब भी उसी पंचायत के प्रभार में
ग्रामीणों ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि जिन निर्माण कार्यों और अभिलेखों की जांच की जा रही है, उनसे जुड़े पंचायत सचिव अब भी उसी ग्राम पंचायत का प्रभार संभाल रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब शिकायत गंभीर है और जांच जारी है, तब निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित सचिव को जांच पूरी होने तक प्रभार से अलग क्यों नहीं किया गया।
उनका कहना है कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारी का उसी पद पर बने रहना स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है। इससे अभिलेखों की सुरक्षा और जांच की निष्पक्षता को लेकर भी प्रश्न उठते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए जांच पूरी होने तक संबंधित सचिव को प्रभार से अलग किया जाए।
दो दिन में रिपोर्ट सौंपने का दावा
मामले में जांच दल के सदस्य एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के इंजीनियर संतोष डेहरिया ने बताया कि जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। कुछ बिंदुओं का परीक्षण शेष है। उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंप दी जाएगी।
रिपोर्ट पर टिकी ग्रामीणों की नजर
अब पूरे मामले में ग्रामीणों की निगाह जांच रिपोर्ट पर है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में केवल वर्तमान स्थिति का उल्लेख नहीं होना चाहिए, बल्कि शिकायत के समय निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति, अधूरे कार्यों, भुगतान प्रक्रिया, निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका का भी स्पष्ट एवं तथ्यात्मक उल्लेख होना चाहिए। उनका मानना है कि तभी जांच का उद्देश्य पूरा होगा और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
इन सवालों के जवाब का इंतजार…
- जांच दल के पहले निरीक्षण के बाद एक माह तक जांच लंबित क्यों रही?
- यदि शिकायत गंभीर थी तो समयबद्ध जांच क्यों नहीं हुई?
- क्या जांच में हुई देरी के दौरान अधूरे कार्य पूरे कराने और कथित कमियां दूर करने का अवसर मिल गया?
- जांच जारी रहने के बावजूद संबंधित पंचायत सचिव अब भी उसी पंचायत का प्रभार क्यों संभाल रहे हैं?
- क्या निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जांच पूरी होने तक प्रभार से अलग किया जाना चाहिए?
- क्या जांच रिपोर्ट शिकायत के समय की वास्तविक स्थिति को आधार बनाएगी या वर्तमान स्थिति को?
इनका कहना
संतोष डेहरिया, सदस्य, जांच दल एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा इंजीनियर ने कहा,
“अभी जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। कुछ बिंदुओं का परीक्षण बाकी है। अगले दो दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंप दी जाएगी।”







