श्री 1008 सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का भव्य समापन

संवाददाता पूजा मालवीय
करेली। नगर के सुभाष मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम पूज्य मुनि श्री 108 महासागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसमें नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।
समापन दिवस पर प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का सुभाष मैदान में पहुंचना प्रारंभ हो गया था। विधि-विधानपूर्वक सिद्धचक्र महामण्डल विधान, अभिषेक, शांतिधारा एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजा-अर्चना कर देश, समाज एवं विश्व में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर अपने प्रवचनों में पूज्य मुनि श्री 108 महासागर जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण एवं सदाचार के मार्ग पर चलना है। उन्होंने धर्म, अहिंसा, संयम और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धार्मिक अनुष्ठान केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि एवं समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का माध्यम हैं।
समापन समारोह के दौरान विशाल धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के प्रेरणादायी उद्बोधन का लाभ प्राप्त किया। नौ दिनों तक चले इस धार्मिक महोत्सव में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आराधना एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सकल जैन समाज, आयोजन समिति एवं नगरवासियों का विशेष योगदान रहा। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता एवं सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करते हैं।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। जयघोषों और मंगल ध्वनियों के बीच कार्यक्रम का समापन हुआ तथा सभी श्रद्धालुओं ने विश्वशांति, मानव कल्याण और समाज की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।







