रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला: कैंसर से पीड़ित पति को छोड़ पत्नी ने की दूसरी शादी, कोर्ट से वारंट जारी
मध्य प्रदेश के रतलाम में इंस्टाग्राम पर हुई प्रेम शादी के बाद पति को कैंसर होने पर पत्नी द्वारा दूसरी शादी करने का मामला चर्चा में है। बिना तलाक दूसरी शादी के आरोप में कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

रतलाम/इंदौर। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर बने रिश्तों और वैवाहिक विश्वास पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद प्रेम विवाह करने वाले एक दंपती की जिंदगी तब बदल गई जब शादी के कुछ महीनों बाद पति को गले का कैंसर हो गया। आरोप है कि बीमारी का पता चलते ही पत्नी ने पति से दूरी बना ली और तलाक का मामला न्यायालय में लंबित रहने के बावजूद दूसरे युवक से विवाह कर लिया।
इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती, फिर प्रेम विवाह
जानकारी के अनुसार, रतलाम निवासी आकाश और साक्षी की मुलाकात इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। बातचीत बढ़ी, दोनों एक-दूसरे के करीब आए और 20 नवंबर 2022 को इंदौर के आर्य समाज मंदिर में विवाह कर लिया। बाद में दोनों परिवारों ने भी इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया और सामाजिक रीति-रिवाज से शादी संपन्न हुई।
शादी के कुछ महीनों बाद पति को हुआ कैंसर
शादी के कुछ महीने बाद आकाश को गले के कैंसर का पता चला। परिवार ने इलाज शुरू कराया, लेकिन आरोप है कि इसी दौरान पत्नी का व्यवहार बदल गया। पति का कहना है कि पत्नी ने बीमारी के कारण उसके साथ रहने से इनकार कर दिया और अलग रहने लगी।
तलाक लंबित रहने के दौरान दूसरी शादी का आरोप
आकाश का आरोप है कि तलाक की अर्जी न्यायालय में विचाराधीन रहने के बावजूद पत्नी ने दूसरे युवक से विवाह कर लिया। इसके बाद उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट
मामले में बिना तलाक दूसरी शादी करने के आरोप में दायर प्रकरण की सुनवाई के दौरान आरोपित पक्ष के लगातार अनुपस्थित रहने पर न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। वहीं, पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद और अन्य कानूनी मामले भी न्यायालय में विचाराधीन रहे।
आर्थिक और पारिवारिक संकट से जूझ रहा पति
आकाश का कहना है कि वह लंबे समय से कैंसर का इलाज करा रहा है। इस दौरान उसने अपने माता-पिता को भी खो दिया। वर्तमान में उसके इलाज और अन्य खर्चों में मित्र सहयोग कर रहे हैं, जबकि अधिवक्ता भी बिना फीस के उसका पक्ष रख रहे हैं। आकाश का कहना है कि उसे न्यायपालिका पर भरोसा है और वह न्याय मिलने की उम्मीद नहीं छोड़ना चाहता।







