SDM कार्यालय या दलालों का अड्डा? वकीलों के आरोपों से गरमाई सोहागपुर तहसील
गंदगी, बाबुओं की मनमानी और कथित दलाल तंत्र पर अधिवक्ताओं का फूटा गुस्सा

संवाददाता राकेश पटेल एक्का
सोहागपुर। तहसील और एसडीएम कार्यालय आम जनता के लिए न्याय और प्रशासनिक राहत का केंद्र माने जाते हैं, लेकिन सोहागपुर एसडीएम कार्यालय को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि यहां व्यवस्था से ज्यादा अव्यवस्था हावी है और आम लोगों की समस्याओं के बीच कथित दलाल तंत्र सक्रिय होकर पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहा है।
सोमवार को सोहागपुर के अधिवक्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। दर्जनों वकील सीधे एसडीएम प्रियंका भल्लावी से मिलने पहुंचे और कार्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर कड़ा विरोध जताया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्यालय परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है, मूत्रालयों में पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है और जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी कर रहे हैं।
“कार्यालय में सक्रिय हैं दलाल” — अधिवक्ताओं का आरोप
मामला सिर्फ अव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा। अधिवक्ताओं ने कार्यालय में कथित दलाल तंत्र के सक्रिय होने का गंभीर आरोप लगाया। अधिवक्ता विक्रम रघुवंशी ने कहा कि कई ऐसे लोग कार्यालय में खुलेआम सक्रिय हैं जो अधिवक्ता नहीं हैं, लेकिन बाबुओं से सांठगांठ कर मामलों को निपटाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ये लोग किसके संरक्षण में काम कर रहे हैं? यदि कार्यालय में बाहरी लोगों की भूमिका इतनी बढ़ चुकी है, तो क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
नामांतरण मामलों में जुर्माने का विरोध
अधिवक्ताओं ने नामांतरण प्रकरणों में देरी होने पर लगाए जाने वाले जुर्माने को भी गलत बताया। उनका कहना था कि कई बार तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया में देरी होती है, लेकिन उसका दोष अधिवक्ताओं पर डालकर अनावश्यक जुर्माना लगाया जाता है।
इसके साथ ही सभी मामलों में वकालतनामा अनिवार्य करने की मांग भी रखी गई, ताकि फर्जी पैरवी और कथित दलालों की भूमिका पर रोक लगाई जा सके।
कई अधिवक्ता रहे मौजूद
एसडीएम कार्यालय पहुंचे अधिवक्ताओं में मंगल सिंह रघुवंशी, अभिलाष सिंह चंदेल, संजय तिवारी, नीरज शर्मा, प्रांजल तिवारी, पोहप सिंह रघुवंशी, ललित कहार और प्रतीक तिवारी सहित कई वकील मौजूद रहे।
एसडीएम प्रियंका भल्लावी ने अधिवक्ताओं की समस्याएं सुनकर जल्द निराकरण का आश्वासन दिया है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला केवल आश्वासनों तक सीमित रहेगा या फिर तहसील कार्यालय में फैली अव्यवस्थाओं और कथित दलाल तंत्र पर वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई भी होगी।







