मध्य प्रदेश

कलेक्टर-एसपी सड़क पर उतरे, लेकिन आरटीओ दफ्तर से बाहर कब निकलेगा?

प्रोजेक्ट सुरक्षा के तहत ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लगे रेडियम रिफ्लेक्टर, परिवहन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

नर्मदापुरम। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा “प्रोजेक्ट सुरक्षा” इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा और एसपी साई कृष्ण एस थोटा स्वयं मैदान में उतरकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रेडियम रिफ्लेक्टर लगवा रहे हैं, लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रति जागरूक कर रहे हैं तथा सीपीआर प्रशिक्षण जैसे अभियान भी चला रहे हैं।

प्रशासन की यह सक्रियता सड़क सुरक्षा के प्रति एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है, लेकिन इसी बीच शहर में एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है—

आखिर आरटीओ विभाग कहां है?

जिस विभाग की मूल जिम्मेदारी सड़क परिवहन नियमों का पालन करवाना, वाहनों की फिटनेस जांचना और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वही विभाग इस पूरे अभियान में कहीं नजर नहीं आ रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नए आरटीओ अधिकारी के पदभार संभालने के बाद से उनकी जमीनी मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी है। शहर में चर्चा है कि सड़कों पर ओवरलोड वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं, कई वाहन बिना फिटनेस के संचालित हो रहे हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना संकेतकों के हाईवे पर निकल रही हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई करने के बजाय पूरा भार जिला प्रशासन और पुलिस उठा रहे हैं।

मंडियों में हादसों का खतरा

उपार्जन सीजन के दौरान मंडियों में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही होती है। रात के समय बिना रिफ्लेक्टर और संकेतकों वाले वाहन दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। ऐसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रेडियम रिफ्लेक्टर लगाने की पहल को काफी सराहा जा रहा है।

प्रशासन और पुलिस मैदान में सक्रिय

कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है। वहीं पुलिस विभाग लगातार हेलमेट चेकिंग और यातायात नियमों के पालन को लेकर अभियान चला रहा है।

जनता पूछ रही – परिवहन विभाग कब जागेगा?

शहर में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जब कलेक्टर और एसपी खुद सड़क पर उतरकर अभियान चला सकते हैं, तो परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर जनता के बीच कब दिखाई देंगे?

लोगों का कहना है कि यदि आरटीओ विभाग भी सक्रिय रूप से मैदान में उतरे, तो सड़क सुरक्षा अभियान और अधिक प्रभावी हो सकता है।

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