गाडरवारा में आद्यगुरु शंकराचार्य जयंती श्रद्धाभाव से मनाई गई, विधि-विधान से हुआ पूजन
गाडरवारा में आद्यगुरु शंकराचार्य जी की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। सर्व ब्राह्मण महासभा द्वारा पूजन, आरती और नर्मदाष्टक पाठ का आयोजन किया गया।

गाडरवारा। आदि शंकराचार्य जी की जयंती सर्व ब्राह्मण महासभा द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। यह आयोजन समाज के नवनिर्मित भवन में संपन्न हुआ, जहां विधि-विधान से पूजन, आरती और प्रसाद वितरण किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित विप्रजनों ने आचार्य शंकर के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। बताया गया कि उनका जन्म 788 ई. में केरल के कावड़ी नामक गांव में हुआ था। वे महान दार्शनिक और सनातन धर्म को नई दिशा देने वाले संत थे।
आदि शंकराचार्य ने पूरे भारतवर्ष की पदयात्रा कर समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। उन्होंने चारों दिशाओं में चार प्रमुख मठों की स्थापना की—
- गोवर्धन मठ पुरी (पूर्व)
- शारदा मठ द्वारका (पश्चिम)
- श्रृंगेरी मठ (दक्षिण)
- ज्योर्तिमठ बद्रीनाथ (उत्तर)
इन मठों के माध्यम से उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा और जनकल्याण का संदेश दिया, जिसकी परंपरा आज भी जारी है।
आचार्य शंकर ने अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की, जिनमें ब्रह्मसूत्र भाष्य, भगवद्गीता भाष्य, उपनिषद भाष्य, विवेक चूड़ामणि और सौन्दर्य लहरी प्रमुख हैं। लोकप्रिय नर्मदाष्टक की रचना भी उन्होंने ही की।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक नर्मदाष्टक का पाठ कर समापन किया गया। इस अवसर पर समाज के अनेक विप्रजन उपस्थित रहे और सभी ने आचार्य शंकर के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।







