मध्य प्रदेश

बीजादेही पंचायत में ‘सरपंच पति राज’ के आरोप, महिला आरक्षण की मंशा पर उठे सवाल

बीजादेही पंचायत में सरपंच पति द्वारा संचालन के आरोप, महिला आरक्षण और पंचायत व्यवस्था पर उठे सवाल। ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग।

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता

शाहपुर: जनपद पंचायत शाहपुर की ग्राम पंचायत बीजादेही एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला पंचायत में कथित “सरपंच पति राज” का है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि महिला सशक्तिकरण की अवधारणा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में सरपंच का पद भले ही महिला के लिए आरक्षित है, लेकिन जमीनी स्तर पर सभी निर्णय, बैठकों में भागीदारी और प्रशासनिक कार्य सरपंच के पति द्वारा किए जा रहे हैं। निर्वाचित महिला सरपंच की भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है।

बैठकों से फैसलों तक पति की भूमिका प्रमुख

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत की बैठकों में जहां निर्वाचित सरपंच की उपस्थिति अनिवार्य होती है, वहां कई बार उनके पति ही शामिल होते हैं। यही नहीं, विकास कार्यों की योजना, क्रियान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों में भी वही सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

गांव में भी वे खुद को सरपंच के रूप में प्रस्तुत करते हैं और आम लोगों से उसी रूप में संवाद करते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत माना जा रहा है।

महिला आरक्षण की भावना पर सवाल

पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने का उद्देश्य उन्हें नेतृत्व में आगे लाना और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना था। लेकिन बीजादेही की स्थिति यह दर्शाती है कि आरक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया है और वास्तविक सत्ता किसी और के हाथ में है।

यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि पंचायत के सभी कार्य, निर्णय और बैठकों में भागीदारी निर्वाचित सरपंच द्वारा ही की जानी चाहिए।

यदि किसी अन्य व्यक्ति, विशेषकर परिजन द्वारा इन अधिकारों का उपयोग किया जाता है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे में बीजादेही में सामने आ रहे आरोप गंभीर माने जा रहे हैं।

पहले भी विवादों में रही पंचायत

गौरतलब है कि बीजादेही पंचायत पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रही है, जिनमें—

  • सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
  • फ्यूरी मशीन से कार्य कराने के आरोप
  • मजदूरों को रोजगार न मिलने की शिकायत
  • बिलों में कथित गड़बड़ियां

अब “सरपंच पति राज” के आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह संदेह पैदा हो रहा है कि या तो अधिकारियों को जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

 

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