क्राइममध्य प्रदेश

33 केवी लाइन के नाम पर हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी!

किसान की निजी भूमि में 11 सागौन कटे, प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता

शाहपुर | शाहपुर से बांका–कुसमेरी–गुरुगुंदा होते हुए भौंरा तक बिछाई जा रही 33 केवी विद्युत लाइन के निर्माण कार्य ने पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक निगरानी की पोल खोल दी है। लाइन निर्माण की आड़ में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनसे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

निजी खेत में बिना अनुमति 11 सागौन कटे

ग्राम बांकाखोदरी निवासी किसान राजेश रायपुरे ने राजस्व विभाग को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि उनके खेत खसरा नंबर 350 में बिना किसी पूर्व सूचना, अनुमति या मुआवजे के 11 सागौन के पेड़ काट दिए गए। इनमें से तीन सागौन के पेड़ अत्यंत पुराने और कीमती बताए जा रहे हैं, जिससे किसान को भारी आर्थिक क्षति हुई है।

किसान का कहना है कि न तो उनसे कोई सहमति ली गई, न कोई नोटिस दिया गया—सीधे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। यह न सिर्फ निजी संपत्ति का हनन है, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी है।

शिकायत से आगे भी दिखी कटाई की सच्चाई

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि शिकायत केवल एक किसान की निजी भूमि तक सीमित है, लेकिन लाइन मार्ग के निरीक्षण में अन्य कई स्थानों पर भी सागौन व स्थानीय प्रजातियों के कटे पेड़ दिखाई दिए, जिनमें शासकीय भूमि भी शामिल बताई जा रही है।
प्रश्न यह है कि यदि शिकायत न होती, तो क्या यह अवैध कटाई कभी सामने आती?

ठेकेदार और विभाग दोनों पल्ला झाड़ते नजर

विद्युत विभाग के सहायक अभियंता एई गुप्ता ने कहा कि 33 केवी लाइन का कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है और उन्हें पेड़ कटाई की कोई जानकारी नहीं है।
वहीं, ठेकेदार अग्रवाल पावर हाउस, भोपाल के प्रतिनिधि विकास राठौड़ ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि केवल शाखाओं की ट्रिमिंग की गई है, किसी पेड़ को जड़ से नहीं काटा गया।

लेकिन मौके पर कटे पेड़ों के ठूंठ कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि अगर कटाई नहीं हुई, तो ये कटे पेड़ किसने काटे? क्या बिना विभागीय अनुमति ट्रिमिंग भी नियमों के अंतर्गत आती है?

कानून की अनदेखी या मिलीभगत?

स्पष्ट है कि सागौन जैसे संरक्षित वृक्षों की कटाई या छंटाई के लिए भी विधिवत अनुमति अनिवार्य होती है। ऐसे में यह मामला केवल एक किसान के नुकसान का नहीं, बल्कि पर्यावरण कानूनों, वन अधिनियम और प्रशासनिक नियंत्रण की गंभीर अनदेखी का बनता जा रहा है।

जांच की बात, लेकिन कार्रवाई कब?

शाहपुर तहसीलदार टी. विश्क ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

लेकिन सवाल यह है—
जब मौके पर कटे पेड़ साफ दिखाई दे रहे हैं, तो क्या अब भी सिर्फ जांच ही काफी है?
क्या दोषियों पर तुरंत एफआईआर, जुर्माना और नुकसान की भरपाई नहीं होनी चाहिए?

जनता की मांग: सिर्फ जांच नहीं, तत्काल सख्त कार्रवाई

यह मामला प्रशासन के लिए अंतिम चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण और किसानों के अधिकारों को कुचला जा सकता है

अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिकायत को फाइलों में दबाकर रखता है, या वास्तव में कानून के मुताबिक दोषियों पर कार्रवाई कर किसानों और प्रकृति को न्याय दिलाता है।

 

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