सोहागपुर में हरियाली पर कुल्हाड़ी, प्रशासन मूकदर्शक, मुख्यमंत्री के दौरे में व्यस्त रहा सिस्टम, पीछे-पीछे दर्जनों पेड़ काट दिए गए
सोहागपुर में दर्जनों आम के पेड़ काट दिए गए, प्रशासन पूरी तरह मौन रहा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के बाबई दौरे के दौरान पेड़ कटते रहे और अधिकारी व्यस्त रहे। पर्यावरणीय हानि पर जनता में आक्रोश।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर। नगर में पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर थी, वही अधिकारी पूरी तरह मौन और निष्क्रिय नजर आए। नतीजा यह हुआ कि दर्जनों हरे-भरे आम के पेड़ काट दिए गए, और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी — या यूं कहें कि जानबूझकर अनदेखी की गई।
सोहागपुर नगर, जहां औद्योगिक गतिविधियां और नगर नियोजन के दायित्व पहले से मौजूद हैं, वहां हरित आवरण बचाने के बजाय उसे खामोशी से खत्म किया जा रहा है। आम के वे पेड़, जो वर्षों से नगरवासियों को छाया, शुद्ध हवा और पर्यावरणीय संतुलन दे रहे थे, आज जमीन पर गिरे पड़े हैं।

राजस्व निरीक्षक का ट्रांसफर, सिस्टम चरमराया
17 जून को नजूल राजस्व निरीक्षक के ट्रांसफर के बाद, पूरे नगर का राजस्व दायित्व एक अकेले पटवारी के भरोसे छोड़ दिया गया। यही पटवारी अब राजस्व निरीक्षक के साथ-साथ अन्य सभी राजस्व कार्य भी देख रहा है।
स्पष्ट है कि न निगरानी बची, न जवाबदेही।
जब तहसील कार्यालय द्वारा इस संबंध में पटवारी से संपर्क किया गया, तो जवाब मिला —
“देखता हूँ”
और इसी “देखता हूँ” के बीच पेड़ कटते रहे, धूल उड़ती रही, पर्यावरण नष्ट होता रहा और प्रशासन सोता रहा।
मुख्यमंत्री के दौरे में हुआ खेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी बाबई आए हुए थे, उस समय पूरा प्रशासन उनकी व्यवस्था में व्यस्त था।
इसी मौके का फायदा उठाकर नगर में पूरे के पूरे पेड़ काट दिए गए।
न कोई निरीक्षण, न कोई रोक, न कोई कार्रवाई।
जनता में आक्रोश, प्रशासन पर अविश्वास

नगरवासियों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर असंतोष और आक्रोश है। लोग सवाल कर रहे हैं—
- पर्यावरण संरक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित क्यों है?
- जिम्मेदार अधिकारी आखिर जवाबदेह क्यों नहीं हैं?
- क्या मुख्यमंत्री के दौरे के समय कानून भी छुट्टी पर चला जाता है?
अधिकारियों की चुप्पी ने जनता के मन में यह विश्वास पैदा कर दिया है कि सोहागपुर की हरियाली की किसी को परवाह नहीं।
चेतावनी के संकेत साफ
यदि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में सोहागपुर केवल कंक्रीट और धूल का नगर बनकर रह जाएगा।
यह मामला केवल पेड़ों की कटाई का नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता और लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन चुका है।








