बिजली विभाग की कथित क्रूरता से शर्मसार हुआ सिस्टम, मासूम बच्चों को ठंड में सड़क पर बैठने को मजबूर किया
सोहागपुर में बिजली विभाग की कथित मनमानी से परेशान एक गरीब परिवार मासूम बच्चों के साथ SDM कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठा है। गलत बिल और बिजली काटने का आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर।
सोहागपुर में बिजली विभाग की कथित मनमानी और प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। SDM कार्यालय के ठीक सामने एक गरीब परिवार अपने मासूम बच्चों के साथ भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर है, जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ठंड में सड़क पर बैठे मासूम, सिस्टम बना मूकदर्शक
भूख हड़ताल पर बैठे द्वारका प्रसाद कहार अपने पूरे परिवार के साथ कड़ाके की ठंड में सड़क पर बैठे हैं। उनके साथ छोटे-छोटे मासूम बच्चे भी हैं, जिन्हें इस मौसम में घर की गर्माहट मिलनी चाहिए थी, लेकिन वे ठंडी ज़मीन पर बैठकर सिस्टम की बेरुखी झेलने को मजबूर हैं।

खराब मीटर बदला, फिर थमा दिया हजारों का बिल
परिवार का आरोप है कि जिस बिजली मीटर को स्वयं बिजली विभाग ने खराब बताकर बदला, उसी मीटर के नाम पर ₹13,352 का बिल थमा दिया गया। जब उपभोक्ता ने बिल को गलत बताते हुए जांच की मांग की, तो समस्या का समाधान करने के बजाय घर की बिजली काट दी गई।
न सुनवाई, न जांच, सिर्फ दबाव
द्वारका प्रसाद का कहना है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन
- न बिल की जांच की गई
- न कोई लिखित जवाब दिया गया
- उल्टा दबाव और धमकी दी गई
बिजली कटने के बाद परिवार अंधेरे, ठंड और भूख के बीच जीने को मजबूर हो गया।
SDM कार्यालय के सामने धरना, प्रशासन पर उठे सवाल
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि SDM कार्यालय के सामने ठिठुरते मासूम बच्चे और बेबस माता-पिता बैठे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप सामने नहीं आया है। यह दृश्य केवल बिजली विभाग ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए शर्मनाक सवाल बन गया है।
अब सवाल बिजली का नहीं, सिस्टम का है
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक बिजली बिल का नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और गरीब विरोधी रवैये को उजागर करता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना प्रशासन के लिए एक काले अध्याय के रूप में दर्ज होगी।
क्या प्रशासन जागेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
क्या प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर गरीब परिवार को न्याय दिलाएगा, या मासूमों की यह ठंड भी सरकारी फाइलों में दफन कर दी जाएगी?







