धर्ममध्य प्रदेश

गाडरवारा में पहली बार इस्कॉन संन्यासी श्री वसुश्रेष्ठ दास द्वारा संगीतमय भागवत कथा, पंचम दिवस के दिव्य प्रसंगों ने कराया भक्तिमय अनुभव

गाडरवारा में पहली बार इस्कॉन संन्यासी श्री वसुश्रेष्ठ दास द्वारा संगीतमय भागवत कथा आयोजित। पंचम दिवस पर प्रहलाद कथा, वामन अवतार, समुद्र मंथन, राम जन्म और कृष्ण जन्म के दिव्य प्रसंग हुए। पूर्व विधायक साधना स्थापक ने भी कथा में सहभागिता की।

गाडरवारा। शांतिनगर कॉलोनी में श्री ठाकुर सुरेंद्र सिंह जी के निवास पर 21 से 27 नवंबर तक आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तजन उमड़ रहे हैं। गाडरवारा नगर में पहली बार इस्कॉन उज्जैन के संन्यासी एवं इस्कॉन बदनावर के अध्यक्ष, भागवताचार्य श्री वसुश्रेष्ठ दास कथा का वाचन कर रहे हैं, जिन्हें सुनने क्षेत्रभर से भक्त पहुँच रहे हैं।

पंचम दिवस: प्रहलाद से कृष्ण जन्म तक, भक्तिरस का अद्भुत संयोग

आज के पंचम दिवस की कथा अत्यंत भावपूर्ण और ज्ञानप्रद रही। भागवताचार्य श्री वसुश्रेष्ठ दास ने जिन प्रमुख प्रसंगों का वर्णन किया, उनमें शामिल थे—

भक्त प्रहलाद कथा

अत्याचार के बावजूद भगवान पर अटूट भक्ति की अनोखी मिसाल।

वामन अवतार

राजा बलि के लिए भगवान का विनम्र रूप, जिसने त्याग और धर्म का संदेश दिया।

गजेंद्र मोक्ष

गजेंद्र की पुकार पर भगवान विष्णु द्वारा दिया गया मोक्ष, भक्ति की शक्ति का अद्भुत उदाहरण।

समुद्र मंथन कथा

देव–दानव सहयोग, अमृत–हलाहल और भगवान शिव की महिमा का भावपूर्ण वर्णन।

श्री राम जन्म कथा

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के आगमन से पूरी कथा में उमंग और उत्साह का संचार।

मन्वंतर कथा

सृष्टि चक्र और मनुओं की अद्भुत परंपरा का विस्तृत वर्णन।

श्री कृष्ण जन्म

नंदोत्सव, गोकुल के उल्लास और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण का मनोहारी वर्णन — जिससे पांडाल “जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।

अगले दो दिन: सतत श्रीकृष्ण लीला का रसास्वादन

भागवताचार्य ने बताया कि आने वाले दो दिन पूरी कथा श्रीकृष्ण लीला, बाल स्वरूप, ब्रज लीलाओं और महाभारत प्रसंगों पर केंद्रित रहेंगे। भक्तजन इन वृतांतों का विशेष रसास्वादन करेंगे।

पूर्व विधायक साधना स्थापक ने की कथा श्रवण

आज की कथा में पूर्व विधायक श्रीमती साधना स्थापक ने भी उपस्थित होकर कथा श्रवण किया। उन्होंने भागवताचार्य वसुश्रेष्ठ दास से आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा, सद्भाव और सांस्कृतिक जागृति का संचार होता है।उपस्थित भक्तों ने उनका स्वागत किया।

भक्तों की उमड़ी भीड़, भक्ति और संगीत का संगम

प्रतिदिन संध्याकाल में होने वाली कथा में मधुर भजन, कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पहली बार नगर में इतनी भक्तिरसपूर्ण इस्कॉन शैली की कथा सुनने का अवसर मिल रहा है।

 

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