धर्ममध्य प्रदेश

मन की शुद्धि और लोभ का त्याग ही उत्तम शौच धर्म : पं. ओमप्रकाश

पर्युषण पर्व के पांचवें दिन श्री तारण तरण चैत्यालय में हुई उत्तम शौच धर्म की आराधना

गाडरवारा। जैन समाज के पर्वराज पर्युषण पर्व के पांचवें दिन श्री तारण तरण चैत्यालय जी में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ उत्तम शौच धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर विधि-विधानपूर्वक मंदिर विधि संपन्न हुई। बड़ी संख्या में समाजजनों ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर धर्माराधना की।

इस अवसर पर पंडित ओमप्रकाश ने उत्तम शौच धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी शारीरिक स्वच्छता नहीं है, बल्कि मन की शुद्धि और लोभ का त्याग ही इसका वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में लोभ अनेक विकारों का कारण बनता है। तृष्णा, परिग्रह और लालच का त्याग कर संतोष का भाव अपनाने से मन में वास्तविक पवित्रता आती है।

लोभ को बताया पापों की जड़

पंडित ओमप्रकाश ने कहा कि लोभ मनुष्य को निरंतर अधिक पाने की इच्छा की ओर ले जाता है। इसी कारण लोभ को पापों की जड़ बताते हुए उन्होंने इसे ‘पाप का बाप’ कहा। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जीवन में उपलब्ध साधनों के प्रति संतोष का भाव रखना और अनावश्यक इच्छाओं पर नियंत्रण करना ही उत्तम शौच धर्म की सच्ची साधना है।

उन्होंने कहा कि उत्तम शौच मानसिक सुख और शांति का आधार है। जब व्यक्ति अपने भीतर के लालच और ईर्ष्या को कम करता है तथा संतोषी स्वभाव अपनाता है, तब मन शांत होता है और आत्मा का निर्मल स्वरूप प्रकट होने लगता है।

रात में हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम

पर्युषण पर्व के अवसर पर श्री तारण तरण चैत्यालय जी में धार्मिक आयोजनों के साथ रात्रि में वीर श्री महिला मंडल द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। इन आयोजनों में समाज के महिला-पुरुष एवं बच्चे उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!