मध्य प्रदेश

गाडरवारा डंपर हादसा: रात भर चला संघर्ष, तब जाकर पिघला प्रशासन, डंपर हादसे के बाद पीड़ित परिवार को 5 लाख देने पर बनी सहमति

गाडरवारा विधानसभा के ग्राम तुमड़ा में डंपर हादसे के बाद ग्रामीणों का रात भर प्रदर्शन जारी रहा। बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की।

रात भर सड़क पर डटे रहे ग्रामीण, तब जाकर जागा प्रशासन

गाडरवारा। शनिवार को गाडरवारा विधानसभा अंतर्गत ग्राम तुमड़ा में हुए दर्दनाक डंपर हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला। तेज रफ्तार डंपर ने एक युवक को कुचल दिया था, जिसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर रात भर विरोध प्रदर्शन किया।

घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटे रहे और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे। प्रदर्शन देर रात से लेकर सुबह तक लगातार जारी रहा।

पूरी रात धरने पर रहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनीता पटेल

घटना के बाद सुनीता पटेल पूरी रात क्षेत्रीय नागरिकों के साथ धरना स्थल पर मौजूद रहीं। उनके साथ कांग्रेस नेता मनीष राय, ब्लॉक अध्यक्ष लखन पटेल तथा अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ अध्यक्ष हरिसींग अहिरवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन भारी वाहनों पर नियंत्रण करने में नाकाम साबित हो रहा है।

गोलमोल जवाब देता रहा प्रशासन, नहीं माने ग्रामीण

धरना प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सहायता राशि को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा था। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ती गई। ग्रामीण लगातार पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए की सहायता राशि देने की मांग पर अड़े रहे।

रात भर चले संघर्ष और लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा।

सुबह 5 बजे प्रशासन ने मानी मांग

लगातार विरोध और बढ़ते जनाक्रोश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने सुबह करीब 5 बजे घोषणा की कि पीड़ित परिवार को शासन की ओर से 5 लाख रुपए की सहायता राशि दिलाई जाएगी। साथ ही परिवार को अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन भी दिया गया।

इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और लोगों ने राहत की सांस ली।

“पहले मान लेते मांग तो रात भर नहीं करना पड़ता संघर्ष”

जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनीता पटेल ने कहा कि क्षेत्र में बेलगाम डंपर लगातार लोगों की जान ले रहे हैं। यदि प्रशासन पहले ही पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपए सहायता देने की मांग स्वीकार कर लेता, तो लोगों को पूरी रात सड़क पर संघर्ष नहीं करना पड़ता और आम जनता को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

उन्होंने प्रशासन से हाईवे पर भारी वाहनों की निगरानी बढ़ाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

 

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