“चरित्र और साँस ही अभिनय की आत्मा हैं” — अशुतोष राणा, गाडरवारा में NSD की अभिनय कार्यशाला में मास्टर क्लास
गाडरवारा में NSD की अभिनय कार्यशाला में अभिनेता अशुतोष राणा ने मास्टर क्लास ली। उन्होंने चरित्र निर्माण, साँस, अभिनय, अनुशासन और पात्र के मनोविज्ञान की बारीकियां बताईं।

गाडरवारा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली के विस्तार कार्यक्रम तथा रंगसरोकार नाट्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में गाडरवारा में संचालित एक माह की प्रस्तुति-परक अभिनय कार्यशाला में शनिवार को सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं रंगकर्मी अशुतोष राणा ने प्रशिक्षु कलाकारों के लिए विशेष मास्टर क्लास आयोजित की। इस दौरान उन्होंने अभिनय, चरित्र निर्माण और अभिनेता के आंतरिक अनुशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपने अनुभव साझा किए।
चरित्र का निर्माण एकांत में लिए गए निर्णयों से होता है: अशुतोष राणा
मास्टर क्लास में अशुतोष राणा ने कहा, “चरित्र की सबसे बड़ी परीक्षा तब होती है, जब कोई देख नहीं रहा होता। प्रतिष्ठा समाज की दृष्टि में बनती है, जबकि चरित्र हमारे एकांत में लिए गए निर्णयों से निर्मित होता है। महान चरित्र कभी स्वयं का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि अपने आचरण से प्रकट होता है।”
उन्होंने कहा कि रंगमंच केवल अभिनय की कला नहीं, बल्कि स्वयं को जानने और सत्य के साथ जीने की साधना है। अभिनेता जितना अपने भीतर के सत्य से जुड़ता है, उतनी ही प्रामाणिकता के साथ वह मंच पर किसी दूसरे पात्र का जीवन जी पाता है।
अभिनय में साँस की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
अशुतोष राणा ने अभिनय में साँस (Breath) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि साँस अभिनेता की ऊर्जा, भाव, लय और संवाद की वास्तविक आधारशिला है। उन्होंने विभिन्न व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रशिक्षुओं को समझाया कि नियंत्रित और सजग श्वास अभिनय को अधिक स्वाभाविक, प्रभावशाली और जीवंत बनाती है।
उन्होंने कहा कि अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं है, बल्कि शरीर, मन और साँस के सामंजस्य से भावों का सृजन करना है।
पात्र के मनोविज्ञान और मंचीय अनुशासन पर चर्चा
मास्टर क्लास के दौरान अशुतोष राणा ने अभिनेता की तैयारी, पात्र के मनोविज्ञान, एकाग्रता, कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता, अवलोकन क्षमता, मंचीय अनुशासन, संवाद की स्वाभाविकता तथा आंतरिक लय जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने प्रशिक्षु कलाकारों को नियमित अध्ययन और निरंतर अभ्यास के साथ-साथ अपने आसपास के जीवन और उसके सूक्ष्म अनुभवों से सीखने की प्रेरणा दी।
प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा
मास्टर क्लास में प्रशिक्षु कलाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कलाकारों ने अभिनय से संबंधित विभिन्न सवाल पूछे, जिनका अशुतोष राणा ने अपने अनुभवों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। प्रतिभागियों ने मास्टर क्लास को अपने प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक सत्र बताया।
युवा कलाकारों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण
गौरतलब है कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह एक माह की कार्यशाला गाडरवारा के युवा कलाकारों को अभिनय, वॉइस एवं स्पीच, शरीर संचालन, रंगमंचीय खेल, दृश्य विश्लेषण और नाट्य प्रस्तुति का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।
कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर की रंगमंचीय शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें भारतीय रंगपरंपरा के मूल्यों से जोड़ना है। गाडरवारा में आयोजित यह पहल स्थानीय युवा कलाकारों के लिए रंगमंच के क्षेत्र में सीखने और अपनी प्रतिभा को निखारने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो रही है।







