शाहपुर-भौंरा की शराब दुकानों पर ओवररेटिंग के आरोप बरकरार, जांच के आश्वासन के बाद भी ग्राहकों का दावा— आज भी वसूले जा रहे अधिक पैसे
शाहपुर और भौंरा की शराब दुकानों पर एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ग्राहकों का दावा है कि जांच के आश्वासन के बावजूद ओवररेटिंग जारी है। ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर
शाहपुर। शाहपुर और भौंरा की शराब दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले कई दिनों से इस मुद्दे पर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, मीडिया में खबरें प्रकाशित हो रही हैं और आबकारी विभाग द्वारा जांच का आश्वासन भी दिया गया था। इसके बावजूद ग्राहकों का दावा है कि जमीनी स्तर पर अब भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और शराब की बोतलें निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं।
ग्राहकों का कहना है कि शिकायतें करने और मामला सार्वजनिक होने के बाद भी दुकानों पर कथित ओवररेटिंग जारी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जांच के आश्वासन के बाद भी नहीं बदले हालात
शराब दुकानों पर ओवररेटिंग का मामला सामने आने के बाद जिला आबकारी अधिकारी अंशुमान चढ़ार ने कहा था कि उन्हें उपलब्ध जानकारी के अनुसार दुकानों पर निर्धारित दरों पर ही बिक्री की जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, ग्राहकों का आरोप है कि कई दिन बीत जाने के बाद भी दुकानों पर अधिक कीमत वसूली जा रही है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि विभागीय जांच का परिणाम क्या रहा और शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई।
विरोध करने पर अभद्रता का आरोप
स्थानीय ग्राहकों का आरोप है कि जब वे निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूले जाने का विरोध करते हैं, तो कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया जाता है।
ग्राहकों के अनुसार, उन्हें कहा जाता है—
“जो करना है कर लो, जिससे शिकायत करनी है कर दो, हमारा कुछ नहीं होगा। लेना है तो लो, नहीं तो आगे बढ़ो।”
यदि ये आरोप सही हैं, तो मामला केवल अधिक कीमत वसूली तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और विभागीय निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
लोगों के मन में उठ रहे कई सवाल
लगातार शिकायतों के बावजूद अब स्थानीय लोग आबकारी विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जांच का आश्वासन दिया गया था, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि—
- क्या संबंधित शराब दुकानों की जांच की गई?
- क्या बिक्री रजिस्टर और स्टॉक का मिलान किया गया?
- क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई?
- क्या किसी कर्मचारी या दुकान संचालक के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई?
इन सवालों के जवाब अब तक सार्वजनिक नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
ग्राहक बोले— मजबूरी में देना पड़ रहा ज्यादा पैसा
ग्राहकों का कहना है कि कई लोग विवाद से बचने के लिए मजबूरी में अधिक कीमत देकर शराब खरीद रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि कोई ग्राहक विरोध करता है तो उसे बहस और विवाद का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि लगातार शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद यदि कथित ओवररेटिंग जारी रहती है, तो इससे प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
शाहपुर और आसपास के ग्रामीणों ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले एक से दो दिन में पुलिस या आबकारी विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे स्वयं एकजुट होकर अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को पकड़कर प्रशासन के हवाले करेंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्धारित मूल्य पर शराब उपलब्ध हो सके और भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें दोबारा सामने न आएं।







