14 वर्षीय सचिन मेहरा की संदिग्ध मौत का मामला गरमाया, निष्पक्ष जांच की मांग लेकर एसपी से मिला मेहरा समाज महासभा
महमदपुर के तालाब में मिला था बालक का शव, प्रदेश अध्यक्ष मनोज डेहरिया के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन; विसरा परीक्षण, वैज्ञानिक जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग

नरसिंहपुर। जिले के ग्राम महमदपुर निवासी 14 वर्षीय सचिन मेहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। बालक की मौत की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मेहरा समाज महासभा ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज डेहरिया के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्रित हुए और मामले में शीघ्र, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि एक नाबालिग बालक का शव गांव के पास स्थित तालाब में संदिग्ध अवस्था में मिलना गंभीर विषय है। इसलिए घटना की सभी संभावित पहलुओं से जांच की जानी चाहिए, ताकि बालक की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके और यदि इस मामले में कोई दोषी है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।
21 अक्टूबर को घर से निकला था सचिन, दो दिन बाद मिला शव
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम महमदपुर, तहसील एवं जिला नरसिंहपुर निवासी चैनसिंह मेहरा का 14 वर्षीय पुत्र सचिन मेहरा 21 अक्टूबर 2026 को किसी काम से घर से निकला था। देर रात तक उसके वापस नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। इसके बाद परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
लगातार खोजबीन के बाद 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर के समय सचिन का शव गांव के पास स्थित तालाब में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं, बालक की मौत की परिस्थितियों को लेकर ग्रामीणों और समाज के लोगों के बीच भी चिंता व्याप्त है।
हादसा या अन्य कारण, निष्पक्ष जांच से सामने आए सच्चाई
मेहरा समाज महासभा ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि सचिन की मौत तालाब में डूबने से हुई दुर्घटना का परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। महासभा ने मांग की कि मामले की जांच केवल सामान्य प्रक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों, परिस्थितियों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए और किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, मौत के कारणों और किसी संभावित आपराधिक संलिप्तता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें
मेहरा समाज महासभा ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें रखीं—
- निष्पक्ष जांच एवं एफआईआर: मामले में तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप तत्काल आवश्यक प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए।
- विसरा परीक्षण: मृतक बालक का विधिवत विसरा परीक्षण कराया जाए तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
- वैज्ञानिक जांच: तालाब में बालक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक परीक्षण कराया जाए।
- दोषियों पर कार्रवाई: यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- परिवार की सुरक्षा: पीड़ित परिवार को जान-माल की सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे भयमुक्त होकर जांच में सहयोग कर सकें।
- त्वरित कार्रवाई: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में अनावश्यक देरी न की जाए और परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज डेहरिया ने दी आंदोलन की चेतावनी
मेहरा समाज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज डेहरिया ने मामले में जल्द निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि 14 वर्षीय बालक की संदिग्ध मौत की सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जांच के प्रत्येक पहलू को गंभीरता से लिया जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन प्रभावी कदम उठाए।
महासभा ने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है, तो समाज व्यापक जन आंदोलन करने के लिए विवश होगा। ज्ञापन में कहा गया कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
जांच और न्याय की मांग पर टिकीं निगाहें
सचिन मेहरा की मौत के मामले में अब परिजनों और समाज के लोगों की निगाहें पुलिस की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। समाज की मांग है कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने लाई जाएं, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे कानून के अनुसार सजा दिलाई जाए।
फिलहाल, मौत के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में मामले की पारदर्शी जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।







